UK: यूरोप में जानलेवा गर्मी का प्रकोप नीदरलैंड्स में पहली बार जारी हुआ रेड अलर्ट

ब्रुसेल्स। समूचा यूरोप इन दिनों विनाशकारी गर्मी और लू की चपेट में है। बदलती जलवायु के कारण बढ़ते तापमान ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस संकटपूर्ण स्थिति को देखते हुए नीदरलैंड्स ने अपने इतिहास में पहली बार गर्मी को लेकर ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। नेशनल वेदर इंस्टीट्यूट ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि हालात बेहद खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए सरकारी निर्देशों और आपातकालीन सेवाओं की सलाह का कड़ाई से पालन करें।

नीदरलैंड्स में रेड अलर्ट की स्थिति

देश के कुल 12 प्रांतों में से 8 में रेड अलर्ट लागू किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि कई इलाकों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं, देश के उत्तरी हिस्सों और दक्षिणी प्रांत जीलैंड में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। प्रशासन के अनुसार, गर्मी का यह भीषण दौर कम से कम शनिवार तक जारी रहने की संभावना है।

अत्यधिक तापमान के कारण डच रेल ऑपरेटर ने ट्रेन सेवाओं में भारी कटौती कर दी है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचा मंत्री ने नागरिकों को सलाह दी है कि बहुत जरूरी होने पर ही सड़कों पर निकलें, क्योंकि तपती धूप सड़क की सतह और वाहनों के लिए जोखिम पैदा कर रही है।

यूरोप के अन्य देशों का हाल

वैज्ञानिकों के अनुसार, 20 जून से शुरू हुई यह हीटवेव अब तक की सबसे भीषण लू है। यूरोप में जलवायु परिवर्तन की गति वैश्विक औसत से कहीं अधिक तेज देखी जा रही है। फ्रांस और ब्रिटेन में जून महीने के तापमान के पुराने सभी रिकॉर्ड टूट चुके हैं। इटली में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ आने वाले दिनों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की आशंका जताई गई है।

बुनियादी ढांचे पर गर्मी की मार

  • जर्मनी: यहाँ भीषण गर्मी के चलते ‘ए2 मोटरवे’ की कंक्रीट सतह कई जगहों पर मुड़कर फट गई है, जिससे यातायात बाधित हुआ।

  • ऑस्ट्रिया: राष्ट्रीय रेल कंपनी ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दिनों में अत्यधिक गर्मी के कारण रेल की पटरियां मुड़ सकती हैं।

  • स्वीडन: यहाँ ज्यादा तापमान के कारण पटरी मुड़ गई, जिससे एक मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होकर पटरी से उतर गई। इसके कारण स्टॉकहोम और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर गोथेनबर्ग के बीच रेल संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

विशेषज्ञों की चिंता

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में गर्मी का यह स्वरूप डराने वाला है। पटरियों का मुड़ना और कंक्रीट की सड़कों का फटना इस बात का प्रमाण है कि मौजूदा बुनियादी ढांचा बढ़ते वैश्विक तापमान को झेलने के लिए तैयार नहीं है। नीदरलैंड्स जैसे देशों में, जहाँ का मौसम आमतौर पर सुहावना रहता है, वहां 40 डिग्री तापमान पहुंचना भविष्य के लिए एक बड़ा खतरे का संकेत है। प्रशासन ने लोगों से घरों के भीतर रहने और पर्याप्त पानी पीने की अपील की है ताकि हीट स्ट्रोक जैसी स्थितियों से बचा जा सके। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन पूरे महाद्वीप के लिए चुनौतीपूर्ण रहेंगे।

 

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