Uttarakhand: मानसून की चुनौतियों के बीच चारधाम यात्रा ने बनाया नया रिकॉर्ड दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख के पार

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की भारी बारिश और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। तीर्थयात्रियों की अटूट आस्था का प्रमाण है कि यात्रा काल के मात्र 114 दिनों के भीतर ही दर्शनार्थियों का आंकड़ा 47 लाख को पार कर गया है। यह संख्या पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 4.68 लाख अधिक है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल मार्गदर्शन और राज्य सरकार के मुस्तैद आपदा प्रबंधन ने कठिन परिस्थितियों में भी श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाए रखा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम के मिजाज को देखते हुए यात्रा को आवश्यकतानुसार रोक-रोक कर संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं राज्य आपदा कंट्रोल रूम के माध्यम से पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।

पिछले वर्ष की तुलना में भारी बढ़त
इस वर्ष चारधाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुआ था। सोमवार 10 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, कुल 47,02,703 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। जबकि पिछले वर्ष 2025 में इसी अवधि के दौरान 42,34,147 यात्री पहुंचे थे।

धाम का नाम कुल श्रद्धालु (10 अगस्त तक)
बद्रीनाथ धाम 16,12,112
केदारनाथ धाम 14,50,116
गंगोत्री धाम 7,37,629
यमुनोत्री धाम 6,62,347
हेमकुंट साहिब 2,40,499

खराब मौसम के बावजूद जारी है श्रद्धालुओं का उत्साह
प्रशासनिक अलर्ट और लगातार हो रही बारिश के बावजूद सोमवार को भी 15,376 श्रद्धालुओं ने चारों धामों में शीश नवाया। इनमें सबसे अधिक 9,559 यात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे। बद्रीनाथ यात्रा के आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 3.50 लाख से अधिक तीर्थयात्री वहां पहुंच चुके हैं। यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि खराब मौसम के कारण यदि यात्रियों को रुकना पड़े, तो उन्हें कोई असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री का संदेश
“चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और सभी जिलाधिकारियों को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। भूस्खलन या अन्य आपात स्थिति में राहत कार्य तत्काल शुरू करने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। मेरी सभी तीर्थयात्रियों से अपील है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही अपनी आगे की यात्रा तय करें।” – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

 

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