चंडीगढ़। चंडीगढ़ के ऐतिहासिक और विरासत (हेरिटेज) फर्नीचर की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के छात्र आवास से जुड़ी दो कुर्सियां अब सात समंदर पार अमेरिका के शिकागो में नीलामी के लिए रखी गई हैं। इन कुर्सियों की बोली आगामी 13 अगस्त को शिकागो स्थित नीलामी घर ‘राइट’ द्वारा लगाई जाएगी। इस खबर के सामने आने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब विश्वविद्यालय प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।
हेरिटेज आइटम्स प्रोटेक्शन सेल के सदस्य और अधिवक्ता अजय जग्गा ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने उपराष्ट्रपति एवं पंजाब विश्वविद्यालय के चांसलर सीपी राधाकृष्णन और कुलपति प्रो. मीनाक्षी गोयल को पत्र लिखकर इस नीलामी को रुकवाने और इसकी गहन जांच कराने का आग्रह किया है।
लाखों में है कुर्सियों की अनुमानित कीमत
नीलामी घर ‘राइट’ द्वारा जारी सूची के अनुसार, इन कुर्सियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये आंकी गई है।
| नीलामी विवरण | वस्तु का विवरण | अनुमानित कीमत (डॉलर में) | अनुमानित कीमत (भारतीय रुपये में) |
| लॉट नंबर 155 | आठ डाइनिंग चेयर्स | $12,000 – $15,000 | ₹11 लाख – ₹14 लाख |
| लॉट नंबर 161 | एक राइटिंग चेयर | $3,000 – $4,000 | ₹2.5 लाख – ₹3.5 लाख |
नीलामी सूची में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ये कुर्सियां पंजाब विश्वविद्यालय के छात्र आवास का हिस्सा रही हैं। जग्गा ने दावा किया है कि इन कुर्सियों पर पीयू से संबंधित पुराने क्रमांक (मार्किंग) भी मौजूद हैं, जो इनके ऐतिहासिक मूल की पुष्टि करते हैं।
विदेशी धरती पर पहले भी रोकी गई हैं नीलामियां
यह पहली बार नहीं है जब चंडीगढ़ की विरासत को विदेशों में बेचने की कोशिश की गई है। हाल के महीनों में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के सक्रिय हस्तक्षेप से कई नीलामियों को सफलतापूर्व रोका गया है।
| दिनांक | स्थान | कार्यवाही |
| 24 जून | पेरिस, फ्रांस | पंजाब विश्वविद्यालय और पीजीआई से जुड़ी दो कुर्सियों की नीलामी रोकी गई। |
| 15 जुलाई | अमेरिका | पियरे जेनरे की डिजाइन वाली मेज और कुर्सी की नीलामी पर रोक लगाने का प्रयास हुआ। |
| 22 जुलाई | बार्सिलोना, स्पेन | करीब ₹13 लाख मूल्य की हेरिटेज हैंगिंग आर्मचेयर को नीलामी से हटवाया गया। |
सुरक्षा पर उठ रहे गंभीर सवाल
चंडीगढ़ की स्थापना के समय प्रसिद्ध वास्तुकार पियरे जेनरे और ली कार्बूजिए द्वारा डिजाइन किया गया फर्नीचर आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहद कीमती माना जाता है। अजय जग्गा का कहना है कि यह फर्नीचर कड़ी सुरक्षा और नियमों के बावजूद विदेशों तक कैसे पहुंच रहा है, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के माध्यम से शिकागो में होने वाली इस नीलामी पर भी तुरंत रोक लगाई जाए और यह पता लगाया जाए कि ये कुर्सियां भारत से बाहर कैसे तस्करी की गईं। फिलहाल प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन इस मामले की पड़ताल में जुट गए हैं।