Bollywood: डी कंपनी से भी ज्यादा खतरनाक होगी राम गोपाल वर्मा की नई फिल्म पुलिस कंपनी

नई दिल्ली। मुंबई के अपराध जगत पर आधारित अपनी बेहतरीन फिल्मों ‘सत्या’ और ‘कंपनी’ के लिए मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अंडरवर्ल्ड और पुलिस के द्वंद्व को पर्दे पर उतारने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपनी अगली फिल्म ‘पुलिस कंपनी’ का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार की कंपनी टी-सीरीज कर रही है। राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फिल्म का टाइटल साझा करने के साथ ही इसके पीछे की दिलचस्प कहानी और प्रेरणा का भी खुलासा किया है।

यह फिल्म 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में मुंबई पुलिस द्वारा गठित उस विशेष स्क्वाड से प्रेरित होगी, जिसे शहर में गैंगवार और अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया था।

क्या है पुलिस कंपनी का विचार?
राम गोपाल वर्मा ने अपनी फिल्म के शीर्षक को स्पष्ट करते हुए लिखा कि ‘पुलिस कंपनी’ की टैगलाइन है—’यह डी-कंपनी से भी ज्यादा खतरनाक है’। फिल्ममेकर का मानना है कि पुलिस एक संस्था होती है, जबकि अंडरवर्ल्ड या माफिया एक पैसा कमाने वाला संगठन यानी कंपनी होती है। उनका कहना है कि जब किसी संस्था को असीमित अधिकार दे दिए जाते हैं, तो वह बहुत जल्द एक ‘कंपनी’ का रूप ले लेती है। इसी विचार को आधार बनाकर उन्होंने अपनी नई फिल्म की पटकथा तैयार की है।

अंडरवर्ल्ड का इतिहास और स्पेशल स्क्वाड का गठन
अपनी फिल्म की पृष्ठभूमि समझाते हुए वर्मा ने दाऊद इब्राहिम और डी-कंपनी के उदय का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे दाऊद इब्राहिम ने अपने विरोधी गैंग्स का सफाया कर अपने संगठन को एक कंपनी का स्वरूप दिया और फिर दुबई जाकर अपना पूरा कामकाज छोटा राजन को सौंप दिया। बाद में दाऊद और छोटा राजन के बीच हुए अलगाव ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड में एक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया।

इस स्थिति का लाभ उठाकर कई छोटे-बड़े गैंग सक्रिय हो गए और शहर में आपराधिक गतिविधियों के साथ-साथ रंगदारी और हत्याओं का दौर शुरू हो गया। उस समय की व्यवस्था इन गतिविधियों को रोकने में विफल साबित हो रही थी और देश के अन्य हिस्सों से युवा अपराध की दुनिया की ओर आकर्षित हो रहे थे। ऐसी विकट स्थिति में मुंबई पुलिस ने एक ‘स्पेशल स्क्वाड’ बनाया, जिसने 1997 से 2004 के बीच करीब 300 से अधिक गैंगस्टरों का एनकाउंटर किया।

मुंबई अंडरवर्ल्ड और एनकाउंटर का दौर
• समय: 1990 के दशक का अंत और 2004 तक का कालखंड।
• परिस्थिति: दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के अलग होने के बाद बढ़ा अपराध।
• कार्रवाई: मुंबई पुलिस का विशेष दस्ता सक्रिय हुआ।
• परिणाम: इस दस्ते ने 300 से अधिक अपराधियों को मौत के घाट उतारा।

हर्षवर्धन राणे निभाएंगे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का किरदार
राम गोपाल वर्मा ने जानकारी दी कि ‘पुलिस कंपनी’ उस विशेष दस्ते की कार्यप्रणाली और उसके एक चर्चित सदस्य दया नायक के जीवन से प्रेरित होगी। फिल्म में मुख्य भूमिका यानी दया नायक से प्रेरित किरदार अभिनेता हर्षवर्धन राणे निभाते नजर आएंगे। राणे को उनके दमदार अभिनय के लिए जाना जाता है और इस फिल्म में वे एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में दिखाई देंगे।

वर्मा ने बताया कि दया नायक उस टीम के एक महत्वपूर्ण अंग थे और फिल्म उन्हीं के अनुभवों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म में कई अन्य बड़े कलाकारों के होने की भी संभावना है, जिनके नामों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। टी-सीरीज के साथ राम गोपाल वर्मा का यह सहयोग फिल्म को बड़े स्तर पर दर्शकों तक ले जाने की कोशिश है। अंडरवर्ल्ड पर आधारित फिल्मों में महारत रखने वाले वर्मा से दर्शकों को एक बार फिर एक प्रभावशाली फिल्म की उम्मीद है।

 

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