गुरदासपुर। पंजाब के गुरदासपुर में भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित एक पुलिस पोस्ट पर दो जवानों की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। सीमा से महज डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित आदियां पुलिस चेक पोस्ट पर शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को हुई इस बड़ी वारदात को 72 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जांच एजेंसियां अब तक हत्यारों का सुराग लगाने में नाकाम रही हैं।
इस सनसनीखेज घटना ने न केवल स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की सतर्कता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना दोरांगला के अंतर्गत आने वाले गांव आदियां की इस पुलिस पोस्ट पर तैनात सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) गुरनाम सिंह और होमगार्ड जवान अशोक कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ये दोनों जवान उस रात नाके पर अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, जब अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां बरसा दीं।
एएसआई गुरनाम सिंह गांव गादड़ियां के रहने वाले थे, जबकि अशोक कुमार गांव अखलासपुर के निवासी थे। इतनी संवेदनशील जगह पर, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के इतने करीब है, दो पुलिसकर्मियों की हत्या हो जाना और पुलिस का अब तक खाली हाथ होना अधिकारियों की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई बड़ी कामयाबी हाथ नहीं लगी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजीपी अर्पित शुक्ला ने भी इस घटना की बारीकी से जांच को लेकर कड़े निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के पास हत्यारों का कोई सुराग नहीं है। यह देरी इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि सीमा के इतने निकट हुई इस वारदात के पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बलिदानी होमगार्ड जवान अशोक कुमार का सोमवार को उनके पैतृक गांव में पूरे सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं, एएसआई गुरनाम सिंह का अंतिम संस्कार उनके बच्चों के विदेश से लौटने के बाद किया जाएगा। बताया जा रहा है कि उनके बच्चे मंगलवार को भारत पहुंच रहे हैं।
वर्तमान में पूरी पुलिस टीम और आला अधिकारी केवल ‘जांच जारी है’ की बात कह रहे हैं। इलाके में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पुलिस अपने ही साथियों के हत्यारों को पकड़ने में अब तक क्यों विफल रही है। अब देखना यह है कि सुरक्षा एजेंसियां कब तक इन अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा पाती हैं और इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझा पाती हैं।