लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम के बदलते मिजाज और प्राकृतिक आपदाओं से नागरिकों के जान-माल की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने एक नई और हाईटेक व्यवस्था तैयार की है। अब प्रदेश में खराब मौसम की सटीक जानकारी और चेतावनी देने के लिए राहत आयुक्त कार्यालय यूपी 112 की मदद लेगा। इसके तहत यूपी 112 की सभी पुलिस रिस्पांस व्हीकल (पीआरवी) गाड़ियां अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को मौसम के प्रति जागरूक और सतर्क करेंगी।
राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, जब भी किसी क्षेत्र में मौसम विभाग द्वारा हाई अलर्ट, रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी किया जाएगा, तो उस इलाके में तैनात पीआरवी गाड़ियां तुरंत सक्रिय हो जाएंगी। ये वाहन अपने क्षेत्रों में भ्रमण करेंगे और उनमें लगे लाउड हेलर (मेगा फोन) के माध्यम से उद्घोषणा करेंगे। इस घोषणा के जरिए स्थानीय नागरिकों को आने वाले खतरे जैसे भारी बारिश, तूफान या बिजली गिरने की संभावना के बारे में विस्तार से बताया जाएगा ताकि वे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
इस पहल की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उन निर्देशों के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की बात कही थी। योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों आपदा राहत को लेकर हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिए थे कि खराब मौसम के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए तकनीक और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर समन्वय किया जाए। मुख्यमंत्री की इसी मंशा के अनुरूप राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने यूपी 112 की टीमों को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जोड़ा है।
राहत आयुक्त कार्यालय ने न केवल पुलिस बल्कि स्थानीय निकायों को भी इस अभियान में शामिल किया है। प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों, नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने सार्वजनिक उद्घोषणा सिस्टम का उपयोग करें और मौसम संबंधी अलर्ट का निरंतर प्रसारण सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे रेडियो और कम्युनिटी रेडियो ऑपरेटरों के माध्यम से इन चेतावनियों को तत्काल प्रसारित करवाएं।
सूचना प्रसारण के लिए डिजिटल तकनीक का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। राहत आयुक्त ने बताया कि मुख्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम के माध्यम से उन जिलों के नागरिकों को विशेष मोबाइल सायरन भेजे जा रहे हैं, जहां मौसम के बिगड़ने की प्रबल संभावना होती है। इसके लिए ‘सचेत’ एप्लीकेशन का सहारा लिया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में लगभग 37 लाख से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं को मोबाइल सायरन के माध्यम से खतरे की चेतावनी दी जा चुकी है।
सरकार का प्राथमिक उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाली जनहानि को न्यूनतम करना है। विशेषकर बिजली गिरने और अचानक आने वाले तूफानों के समय ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना का अभाव बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनता है। अब पीआरवी वाहनों की मौजूदगी और लाउड हेलर के जरिए होने वाली घोषणाओं से दूर-दराज के इलाकों में काम कर रहे किसानों और मजदूरों को भी समय रहते सूचना मिल सकेगी। शासन का मानना है कि पुलिस, प्रशासन और तकनीक का यह साझा प्रयास आपदा प्रबंधन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मौसम संबंधी सूचनाओं के प्रसार में किसी भी स्तर पर देरी न हो।
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