Uttarakhand: बद्रीनाथ धाम चढ़ावा हेराफेरी मामले में उच्चस्तरीय जांच आज से शुरू मंडलायुक्त के नेतृत्व में टीम खंगालेगी रिकॉर्ड

देहरादून। बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे की गणना में हुई हेराफेरी के संवेदनशील मामले को लेकर उत्तराखंड शासन पूरी तरह गंभीर है। शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच समिति मंगलवार को बद्रीनाथ धाम पहुंचकर धरातल पर अपनी जांच शुरू करेगी। यह समिति न केवल मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को परखने के लिए हर छोटे-बड़े पहलू का स्थलीय निरीक्षण भी करेगी। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में जांच के दायरे को काफी विस्तृत रखा गया है।

मंडलायुक्त आनंद स्वरूप के नेतृत्व वाली यह उच्चस्तरीय टीम बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे के संग्रह से लेकर उसके बैंक में जमा होने तक की पूरी श्रृंखला का बारीकी से परीक्षण करेगी। इसमें दान पात्रों से चढ़ावा निकालने, उसे सुरक्षित भंडारण कक्ष तक पहुंचाने, गणना कक्ष की गतिविधियों, गणना के दौरान अपनाई जाने वाली विधि, दस्तावेजों के रखरखाव और बैंक में जमा करने तक की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की जांच शामिल है। समिति विशेष रूप से मंदिर परिसर की सीसीटीवी व्यवस्था की प्रभावशीलता को भी जांचेगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निगरानी तंत्र में कहां चूक हुई।

जांच के दौरान समिति मंदिर के महत्वपूर्ण अभिलेखों, स्टॉक रजिस्टरों और डिजिटल रिकॉर्ड का भी मिलान करेगी। इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि क्या रिकॉर्ड में दर्ज राशि और वास्तव में जमा राशि के बीच कोई बड़ा अंतर है। मंडलायुक्त के नेतृत्व वाली टीम इस मामले में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के शीर्ष पदाधिकारियों से लेकर गणना कार्य में लगे छोटे कर्मचारियों तक से गहन पूछताछ कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पहले ही सक्रिय है और मुख्य आरोपित प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रमोद नौटियाल से फिलहाल पूछताछ जारी है और उसके बयानों के आधार पर कई अन्य संदिग्धों पर भी नजर रखी जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह सुराग लगाने में जुटी हैं कि क्या चढ़ावे की यह चोरी केवल एक व्यक्ति की निजी करतूत थी या मंदिर प्रबंधन के भीतर कोई संगठित तंत्र इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहा था। सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक साक्ष्यों की मदद से इस पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। शासन की इस उच्चस्तरीय जांच से यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में मंदिर प्रबंधन की व्यवस्थाओं को और अधिक फूलप्रूफ और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

 

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