नई दिल्ली। आयरलैंड में एक फूड बैंक के बाहर कतार में खड़े भारतीय मूल के छात्रों की एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस तस्वीर के सार्वजनिक होने के बाद वहां रह रहे भारतीयों के खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणियों का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय नागरिक और सोशल मीडिया यूजर्स इस बात पर कड़ा आक्रोश जता रहे हैं कि जो छात्र अपना निजी खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें देश का वीजा ही क्यों दिया जा रहा है।
पूरा मामला आयरिश टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट से शुरू हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि गैलवे यूनिवर्सिटी के फूड बैंक में वर्तमान में खाद्य सामग्री की भारी कमी हो गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि हर हफ्ते सैकड़ों छात्रों को बिना भोजन दिए ही वापस भेजना पड़ता है क्योंकि वहां राशन कम पड़ गया है। समाचार पत्र ने अपनी इस रिपोर्ट के साथ एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र मुफ्त भोजन के लिए फूड बैंक के बाहर लंबी लाइन लगाकर खड़े नजर आ रहे हैं।
हालांकि, आयरिश टाइम्स की इस रिपोर्ट में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया कि लाइन में लगे छात्र केवल भारतीय हैं या उनकी वजह से ही भोजन की कमी हो रही है। लेकिन तस्वीर में दिख रहे चेहरों के आधार पर सोशल मीडिया पर निशाना केवल भारतीय छात्रों को बनाया जा रहा है। तस्वीर वायरल होते ही आयरलैंड के कई स्थानीय लोगों ने भारतीय छात्रों पर मुफ्त भोजन की सुविधा का अनुचित लाभ उठाने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।
विरोध करने वालों का तर्क है कि जब अंतरराष्ट्रीय छात्र अच्छे और सक्षम परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, तो उन्हें उन संसाधनों का उपयोग नहीं करना चाहिए जो वास्तव में वहां के अत्यंत जरूरतमंद और गरीब लोगों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि क्या यह केवल उनकी कल्पना है या फिर उस लाइन में खड़े लगभग सभी छात्र विदेशी ही हैं? यूजर ने आगे सवाल उठाया कि क्या विदेशी छात्रों को विदेश में पढ़ने जाने से पहले अपना गुजारा करने में सक्षम नहीं होना चाहिए?
विवाद तब और उग्र हो गया जब कुछ यूजर्स ने सार्वजनिक तौर पर भारतीयों को वापस उनके देश भेजने यानी डिपोर्ट करने की मांग कर डाली। एक अन्य यूजर ने लिखा कि विश्वविद्यालयों को विदेशियों को सीटें बेचना बंद कर देना चाहिए ताकि स्थानीय आयरिश लोग, जिन्हें वास्तव में मदद की जरूरत है, उन्हें सेवाओं का लाभ मिल सके। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कतार में केवल भारतीय छात्र ही क्यों दिखाई दे रहे हैं और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्र समूहों की मौजूदगी वहां क्यों नहीं है। इस घटना ने आयरलैंड में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर दी है और वहां का सामाजिक माहौल तनावपूर्ण होता दिख रहा है।
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