चंडीगढ़।
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मजीठिया की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। वे पिछले लगभग नौ महीनों से पटियाला जिले की नाभा जेल में न्यायिक हिरासत में थे। शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता और एडवोकेट अर्शदीप सिंह क्लेर ने इस आदेश की पुष्टि की, जिसके बाद अकाली दल के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।
बिक्रम सिंह मजीठिया पर पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा लगभग 540 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया था। यह मामला वर्ष 2007 से 2017 के बीच का है, जब वे पंजाब सरकार में मंत्री और विधायक के पद पर आसीन थे। विजिलेंस ब्यूरो ने जून 2025 में एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। एसआईटी का दावा था कि मजीठिया और उनकी पत्नी ने विभिन्न घरेलू और विदेशी शेल कंपनियों के माध्यम से भारी संपत्ति जुटाई थी, जो उनकी आय के वैध स्रोतों से कहीं अधिक थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। मजीठिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित है और उन्हीं सबूतों के आधार पर दर्ज किया गया है जो पहले के एनडीपीएस मामले में इस्तेमाल किए जा चुके थे। उन्होंने मजीठिया की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। वहीं, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने जमानत का विरोध किया था।
अदालत ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया। पीठ ने ध्यान दिलाया कि मजीठिया को 2022 के एनडीपीएस मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है और उस जमानत को रद्द करने की राज्य सरकार की याचिका भी 2025 में खारिज की जा चुकी है। इसके अलावा, अदालत ने माना कि मजीठिया लंबे समय से हिरासत में हैं और पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट पहले ही दाखिल कर चुकी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि आरोप 2007-2017 की अवधि के हैं, जबकि मुकदमा काफी देरी से 2025 में दर्ज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें मजीठिया की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने तब माना था कि यदि नई जांच में अलग अपराध या बड़ी साजिश सामने आती है, तो दूसरी प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने परिस्थितियों का व्यापक आकलन करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट जमानत देते समय उन पर अपनी आवश्यकतानुसार कड़ी शर्तें लगा सकता है। मजीठिया की रिहाई शिरोमणि अकाली दल के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी इसे शुरू से ही सरकार की बदले की कार्रवाई बताती रही है। उल्लेखनीय है कि जिस दिन जमानत का आदेश आया, उसी दिन डेरा ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों भी नाभा जेल में मजीठिया से मिलने पहुंचे थे।
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