देहरादून। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बसे कालसी क्षेत्र में मंगलवार की सुबह एक भीषण सड़क दुर्घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की एक बस यात्रियों को लेकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी कि अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस हृदयविदारक घटना में बस चालक समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों की स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह बस मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे हिमाचल प्रदेश के चौपाल डिपो से रवाना हुई थी। नेरवा पहुँचने के बाद बस ने मीनस-क्वानू-हरिपुर मार्ग से पांवटा साहिब के लिए अपनी यात्रा शुरू की। चश्मदीदों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुबह करीब दस बजे के आसपास जब बस क्वानू के समीप सुदोई खड्ड के पास पहुँची, तो सामने से आ रहे एक ट्रक को रास्ता देने की कोशिश में यह हादसा हो गया। संकरे पहाड़ी रास्ते पर ट्रक को साइड देने के दौरान सड़क का पुश्ता अचानक धंस गया, जिससे चालक का बस पर से नियंत्रण खो गया। बस पहाड़ी से कई पलटे खाते हुए सीधे नीचे बह रही खड्ड में जा गिरी।
हादसे के समय बस में 30 से अधिक लोग सवार थे। जैसे ही बस खाई में गिरी, चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण और स्थानीय लोग तुरंत राहत और बचाव कार्य के लिए मौके पर पहुँचे। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर खाई में उतरकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की टीमें भी राहत सामग्री और बचाव उपकरणों के साथ मौके के लिए रवाना हो गईं।
इस दुखद घटना में जान गंवाने वाले चार लोगों की पहचान कर ली गई है। मृतकों में बस चालक दिनेश कुमार शामिल है, जो चौपाल शिमला का रहने वाला था और उसकी उम्र 54 वर्ष थी। अन्य मृतकों में 46 वर्षीय यास्मीन बेगम, जो क्यारला नेरवा की निवासी थीं, 30 वर्षीय रिचा जो विज़मल नेरवा की रहने वाली थीं और क्यारला नेरवा के ही निवासी धन बहादुर शामिल हैं। इन चारों लोगों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया था। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
हादसे में घायल हुए 15 से अधिक लोगों की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। घायलों में कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन के पहुँचने से पहले ही कई घायलों को अपने निजी वाहनों से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाया। पहाड़ी इलाका होने के कारण बचाव कार्य में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन ग्रामीणों और पुलिस के साझा प्रयासों से सभी घायलों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मार्ग दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। मुख्यमंत्री ने दुर्घटना की जानकारी मिलते ही देहरादून के जिलाधिकारी से दूरभाष पर बातचीत की और उन्हें राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि घायलों के उपचार के लिए जिला प्रशासन और पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने के आदेश दे दिए गए हैं।
पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि क्षेत्र के सभी नजदीकी चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों को हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि घायलों को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा मिल सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि किसी यात्री की स्थिति बहुत अधिक गंभीर होती है, तो उसे बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर उच्च चिकित्सा केंद्रों में भेजने की व्यवस्था भी सरकार द्वारा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से सभी घायल यात्रियों के जल्द स्वस्थ होने और सभी की कुशलता की कामना की है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मीनस-क्वानू-हरिपुर मार्ग पर कई स्थानों पर सड़कें जर्जर स्थिति में हैं और पुश्ते कमजोर हो चुके हैं, जो अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनते हैं। ट्रक और बस जैसे भारी वाहनों के आमने-सामने आने पर साइड देने के लिए जगह की कमी भी एक बड़ी समस्या है। पुलिस प्रशासन ने फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और ट्रक चालक से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल पूरा ध्यान घायलों की जान बचाने और उनके समुचित उपचार पर केंद्रित है। कालसी और नेरवा क्षेत्र में इस हादसे के बाद शोक की लहर दौड़ गई है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन की ओर से मृतकों के आश्रितों को नियमानुसार सहायता राशि देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
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