Uttarakhand: अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी चेहरे की तलाश में सीबीआई ने दर्ज किया मुकदमा – The Hill News

Uttarakhand: अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी चेहरे की तलाश में सीबीआई ने दर्ज किया मुकदमा

देहरादून। उत्तराखंड को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब न्याय की उम्मीदें एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) की दिल्ली स्थित स्पेशल क्राइम ब्रांच (शाखा-2) ने इस मामले के ‘वीआईपी’ एंगल को लेकर दिल्ली में औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीबीआई की एक विशेष टीम राष्ट्रीय राजधानी से रवाना होकर देहरादून और ऋषिकेश पहुंच चुकी है। जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य इस बहुचर्चित हत्याकांड से जुड़े उन अनसुलझे पहलुओं की कड़ियां जोड़ना है, जो पिछले लंबे समय से प्रदेश की जनता के बीच आक्रोश और संशय का विषय बने हुए थे। सीबीआई ने अपनी जांच की शुरुआत उन तमाम डिजिटल साक्ष्यों और बयानों की समीक्षा से की है, जिनके आधार पर मामले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता के आरोप लगाए जा रहे थे।

इस संवेदनशील मामले की पृष्ठभूमि सितंबर 2022 से जुड़ी हुई है, जब ऋषिकेश के गंगा भोगपुर स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम कर रही अंकिता भंडारी अचानक लापता हो गई थी। बाद में यह खुलासा हुआ कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने अपने दो साथियों, मैनेजर सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता की हत्या कर दी थी। 24 सितंबर 2022 को अंकिता का शव चीला नहर से बरामद किया गया था। इस जघन्य अपराध के लिए अदालत ने इन तीनों दोषियों को पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। हालांकि, सजा के बावजूद यह मामला शांत नहीं हुआ, क्योंकि अंकिता के परिजनों और सामाजिक संगठनों का लगातार यह आरोप था कि हत्या के पीछे का असली कारण उस ‘वीआईपी’ व्यक्ति की पहचान छिपाना है, जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था।

यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब ज्वालापुर के पूर्व विधायक की कथित पत्नी उर्मिला सनावर का एक ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में एक प्रभावशाली व्यक्ति यानी ‘वीआईपी’ का जिक्र किया गया था, जिसका संबंध वनंतरा रिजॉर्ट और उस हत्याकांड से होने का दावा किया गया। इस खुलासे के बाद उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अंकिता भंडारी पर उस वीआईपी व्यक्ति को ‘विशेष सेवाएं’ प्रदान करने के लिए दबाव डाला गया था और जब उसने इनकार किया, तो उसकी हत्या कर दी गई। जनता के बीच इस बात को लेकर भारी असंतोष था कि पुलिस की शुरुआती जांच में उस प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सामने क्यों नहीं लाया गया।

राज्य में बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया। जनता की मांग और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने 9 जनवरी 2026 को इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी। मुख्यमंत्री के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रदेश की बेटी को न्याय मिले और यदि इस अपराध में कोई प्रभावशाली व्यक्ति संलिप्त है, तो वह कानून के चंगुल से बच न पाए। केंद्र सरकार द्वारा इस सिफारिश को स्वीकार किए जाने के बाद अब सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने इस कथित ‘वीआईपी’ के खिलाफ केस दर्ज कर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

सीबीआई की टीम अब उन सभी डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है जिन्हें अब तक के साक्ष्यों के तौर पर पेश किया गया है। जांच के केंद्र में वे वायरल ऑडियो और वीडियो संदेश हैं, जिन्होंने पूरे प्रदेश में हलचल मचाई थी। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई अब उन सभी लोगों के बैंकिंग लेनदेन और मोबाइल कॉल डिटेल्स की समीक्षा करेगी, जो उस समय रिजॉर्ट के संपर्क में थे या जिनका संबंध पुलकित आर्य और उसके साथियों से था। सीबीआई उन गवाहों के बयान भी दोबारा दर्ज कर सकती है, जिन्होंने शुरुआत में ‘वीआईपी’ गेस्ट के आने की बात कही थी। इस जांच का एक मुख्य हिस्सा यह भी होगा कि रिजॉर्ट में आने वाले मेहमानों की सूची में क्या कोई हेराफेरी की गई थी या कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट करने का प्रयास किया गया था।

सीबीआई की इस सक्रियता से उन लोगों में खौफ पैदा हो गया है जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे थे। जांच एजेंसी की टीम ऋषिकेश स्थित घटना स्थल का दोबारा निरीक्षण कर सकती है और चीला नहर के आसपास के तकनीकी साक्ष्यों को भी खंगाल सकती है। यह माना जा रहा है कि सीबीआई की दिल्ली शाखा इस मामले को पूरी तरह से निष्पक्ष रखने के लिए स्वतंत्र रूप से साक्ष्य जुटा रही है, ताकि किसी भी स्थानीय प्रभाव की संभावना को खत्म किया जा सके।

उत्तराखंड की जनता और अंकिता भंडारी के माता-पिता लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे कि कब उनकी बेटी की मौत के असली गुनहगार का चेहरा दुनिया के सामने आएगा। सीबीआई द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद अब यह उम्मीद जगी है कि प्रभावशाली चेहरों के पीछे छिपे रहस्य उजागर होंगे। पुष्कर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि न्याय की राह में कोई भी पद या प्रतिष्ठा बाधा नहीं बनेगी। अब सबकी नजरें सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या जांच एजेंसी उस सफेदपोश चेहरे तक पहुंच पाएगी जिसका नाम पिछले तीन वर्षों से हवाओं में तैर रहा है। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की यह लड़ाई अब अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर है।

 

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