मोदीनगर (गाजियाबाद)। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के मोदीनगर क्षेत्र में कानून व्यवस्था और ईमानदारी के दावों के बीच भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक थाना प्रभारी को ही रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस विभाग के एक जिम्मेदार पद पर तैनात अधिकारी द्वारा की गई इस हरकत ने न केवल महकमे को शर्मसार किया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, निवाड़ी थाने के थाना प्रभारी (एसएचओ) जयपाल सिंह रावत को मेरठ की विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब वह एक मामले में नाम हटाने के बदले रिश्वत की रकम वसूल रहे थे।
भ्रष्टाचार का यह पूरा खेल एक मुकदमे से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि निवाड़ी थाने में एक कानूनी मामला दर्ज था, जिसमें से किसी व्यक्ति का नाम निकालने की एवज में सौदेबाजी चल रही थी। आरोप है कि एसएचओ जयपाल सिंह रावत ने मुकदमे से नाम हटाने के बदले पचास हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। कानून के रक्षक द्वारा ही जब कानून की धज्जियां उड़ाई जाने लगीं, तो इस मामले की सूचना विजिलेंस विभाग तक पहुँच गई। जैसे ही भ्रष्टाचार की यह शिकायत पुख्ता हुई, विजिलेंस टीम ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए आरोपी अधिकारी को पकड़ने की योजना बनाई।
इस मामले की शुरुआत अबूपुर गांव के एक पूर्व प्रधान की शिकायत से हुई। पूर्व प्रधान ने साहस दिखाते हुए इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाई और मेरठ विजिलेंस टीम को मामले की पूरी जानकारी दी। शिकायतकर्ता ने बताया कि किस तरह जयपाल सिंह रावत द्वारा उन पर दबाव बनाया जा रहा था और मुकदमे में राहत देने के नाम पर मोटी रकम की मांग की जा रही थी। विजिलेंस टीम ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्यों को एकत्रित किया और योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय समय और स्थान पर रिश्वत की पहली किश्त के रूप में पचास हजार रुपये जयपाल सिंह रावत को दिए, वैसे ही पहले से तैयार बैठी विजिलेंस की टीम ने धावा बोल दिया।
विजिलेंस टीम की इस अचानक छापेमारी से थाने और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। जयपाल सिंह रावत को मौका-ए-वारदात पर रिश्वत की राशि के साथ पकड़ा गया। टीम ने जब रंगे हाथों गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की, तो वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मी और लोग भी स्तब्ध रह गए। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत की गई इस कार्रवाई के दौरान विजिलेंस टीम ने आवश्यक दस्तावेजों को जब्त कर लिया और आरोपी एसएचओ को अपने साथ ले गई। इस गिरफ्तारी के बाद निवाड़ी थाने में सन्नाटा पसरा हुआ है और जिले के उच्चाधिकारियों को भी मामले की रिपोर्ट भेज दी गई है।
आरोपी जयपाल सिंह रावत के खिलाफ अब कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। विजिलेंस की टीम ने उनकी गिरफ्तारी के बाद उनसे घंटों पूछताछ की ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस तरह की रिश्वतखोरी के मामलों में और भी लोग शामिल हैं। अक्सर देखा गया है कि मुकदमों में धाराएं कम करने या नाम निकालने के नाम पर पुलिस थानों में लंबे समय से उगाही का खेल चलता रहता है। मोदीनगर की इस घटना ने इस कड़वे सच को सार्वजनिक कर दिया है। फिलहाल, जयपाल सिंह रावत को न्यायालय के समक्ष पेश करने की तैयारी की जा रही है, जहाँ से उन्हें जेल भेजा जाएगा।
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