इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने सिंधु नदी जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी सेना के शीर्ष नेतृत्व ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वह समझौते के प्रावधानों के तहत पाकिस्तान के हिस्से का पानी हासिल करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। सेना की ओर से आई यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच पहले से ही जारी कूटनीतिक और सैन्य तनाव को और अधिक बढ़ा सकती है।
दरअसल, यह विवाद पिछले साल तब गहराया जब भारत ने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ा निर्णय लिया। पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने 22 अप्रैल 2025 को सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान की ओर जाने से रोकने का संकेत दिया था। भारत के इस कड़े रुख के बाद से ही पाकिस्तान के कई हिस्सों में सिंचाई और पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है, जिसने वहां की सरकार और सेना की चिंता बढ़ा दी है।
कोर कमांडरों की बैठक में सैन्य संकल्प
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अध्यक्षता में सोमवार को रावलपिंडी में एक उच्च स्तरीय कोर कमांडर बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पाकिस्तान की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान सेना ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सरकार के दिशा-निर्देशों और देश की जनता की भावनाओं के अनुरूप, सेना सिंधु नदी के पानी का अपना ‘जायज हिस्सा’ पाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सैन्य अधिकारियों ने 24 अप्रैल 2025 को हुई नेशनल सिक्योरिटी कमेटी की बैठक का भी उल्लेख किया, जिसमें जल सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा माना गया था। सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी पेशेवर तैयारी और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए एकजुट रहने की बात दोहराई है।
1960 के समझौते की पृष्ठभूमि
सिंधु नदी जल बंटवारे का इतिहास काफी पुराना है। साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच ‘सिंधु जल समझौता’ हुआ था। इस संधि के तहत नदियों के पानी का उपयोग करने के अधिकार तय किए गए थे। हालांकि, भारत का तर्क रहा है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के साथ सामान्य सहयोग और संधियों का पालन करना कठिन है। वर्तमान में भारत द्वारा पानी रोके जाने के फैसले ने पाकिस्तान की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाला है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और अफगानिस्तान पर चिंता
कोर कमांडरों की बैठक में केवल जल विवाद ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के अन्य पहलुओं पर भी गौर किया गया। पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में अशांति फैलाने वाले चरमपंथी समूहों की सक्रियता पर गहरी चिंता जताई। सेना ने कहा कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवाद के खतरे को खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान की ओर से सैन्य दखल की बात कहना इस मसले को और अधिक संवेदनशील बना रहा है। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। अब देखना यह होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते जल तनाव पर क्या प्रतिक्रिया देता है। फिलहाल, पाकिस्तानी सेना के इस बयान ने सीमा पर सरगर्मियां बढ़ा दी हैं।
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