Uttarakhand: उत्तराखंड के प्रवासियों ने गोद लिए पैतृक गांव मुंबई में मुख्यमंत्री धामी ने सांस्कृतिक दूतों को सराहा

मुंबई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन में राज्य के प्रवासियों के साथ भावनात्मक संवाद किया। इस भव्य आयोजन में मुख्यमंत्री ने पिछले पांच वर्षों की विकास यात्रा और भविष्य के ‘विकसित उत्तराखंड’ के विजन को साझा किया। उन्होंने देश-दुनिया में बसे उत्तराखंड मूल के लोगों को राज्य का सबसे बड़ा सांस्कृतिक दूत और ब्रांड एंबेसडर बताया। मुख्यमंत्री ने प्रवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी मातृभूमि के विकास में सक्रिय भागीदार बनें।

पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भौगोलिक दूरियां चाहे कितनी भी हों, उत्तराखंड और उसके प्रवासियों के बीच का नाता सदैव अटूट रहता है। उन्होंने मुंबई में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और मूल्यों को जीवित रखने के लिए प्रवासी समाज की सराहना की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रवासी उत्तराखंडियों का अनुभव और विशेषज्ञता राज्य की प्रगति के लिए अत्यंत मूल्यवान है। इसी उद्देश्य से सरकार ने ‘प्रवासी उत्तराखंड परिषद’ का गठन किया है, ताकि प्रवासियों की सहभागिता को एक संस्थागत स्वरूप दिया जा सके।

मातृभूमि के प्रति समर्पण: 29 गांव लिए गोद
मुख्यमंत्री ने एक सुखद जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार के आह्वान पर अब तक 27 प्रवासियों ने अपने पैतृक जुड़ाव को निभाते हुए उत्तराखंड के 29 गांवों को गोद लिया है। ये प्रवासी इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से मुंबई में रहने वाली प्रसिद्ध अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी की प्रशंसा की, जिन्होंने अपने पैतृक गांव को गोद लेकर एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है।

विकास और सुशासन के कीर्तिमान
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड को नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में राज्य ‘अचीवर्स’ की श्रेणी में है।

सांस्कृतिक संरक्षण और कड़े कानून
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार विकास के साथ-साथ राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC), सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगा विरोधी कानून जैसे ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार और अराजकता के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है।

मुख्यमंत्री ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य एक ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी” राज्य के ही काम आए। उन्होंने प्रवासियों से अपने ज्ञान और निवेश के माध्यम से आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में निरंतर सहयोग की अपेक्षा की। सम्मेलन में उपस्थित प्रवासी संगठनों ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया और राज्य के विकास में हर संभव मदद का संकल्प दोहराया। इस दौरान मुंबई और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में उत्तराखंडी समाज के लोग मौजूद रहे।

 

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