देहरादून। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के विरुद्ध केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। बुधवार तड़के सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने राज्य के पांच प्रमुख जिलों में एक साथ छापेमारी की। इस औचक कार्रवाई से सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों, संबंधित विभागों और ठेकेदारों के बीच हड़कंप मच गया है। जांच के दौरान टीमों ने निर्माण कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को अपने कब्जे में ले लिया है।
सीबीआई की इस कार्रवाई का दायरा कुमाऊं से लेकर गढ़वाल मंडल तक फैला रहा। जांच एजेंसियों को लंबे समय से बीआरओ के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में धांधली और सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही थीं। प्राथमिक जांच के बाद मिले ठोस इनपुट के आधार पर बुधवार को तड़के ही टीमों ने चिन्हित ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया।
पांच जिलों में एक साथ एक्शन
सीबीआई ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण से जुड़ी फाइलों को खंगालने के लिए मुनश्यारी, पिथौरागढ़, नैनीताल, हरिद्वार और देहरादून को केंद्र बनाया। सूत्रों के मुताबिक, कुमाऊं क्षेत्र के मुनश्यारी, पिथौरागढ़ और नैनीताल में छापेमारी की कमान सीबीआई देहरादून की टीम के हाथों में थी। इन स्थानों पर अधिकारियों के निजी आवासों, कार्यालयों और कैंप ऑफिसों में सघन तलाशी ली गई।
दूसरी ओर, देहरादून और हरिद्वार जैसे मैदानी जिलों में सीबीआई की उन टीमों ने मोर्चा संभाला, जो दूसरे राज्यों से विशेष रूप से इस ऑपरेशन के लिए बुलाई गई थीं। यहां मुख्य रूप से उन बड़े ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनका बीआरओ के प्रोजेक्ट्स में सीधा हस्तक्षेप रहा है। कुछ स्थानों पर स्थिति को देखते हुए स्थानीय पुलिस का सहयोग भी लिया गया ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश
यह पूरी कार्रवाई बीआरओ द्वारा संचालित विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ियों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के कार्यों में मानकों की अनदेखी कर फर्जी भुगतान लेने और टेंडर प्रक्रिया में चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं। सीबीआई पिछले कई महीनों से इन प्रोजेक्ट्स की आंतरिक फाइलों की गोपनीय तरीके से स्क्रूटनी कर रही थी।
जांच के दौरान टीम ने न केवल कागजी दस्तावेजों की पड़ताल की, बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों के लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त किया है। बैंक खातों और संपत्ति के विवरण भी खंगाले जा रहे हैं ताकि भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित की गई बेनामी संपत्ति का पता लगाया जा सके।
बीआरओ जैसी संस्था, जिस पर देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी होती है, उसके भीतर इस तरह के भ्रष्टाचार के मामले सामने आना राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक शुचिता पर सवाल खड़े करता है। सीबीआई की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब संगठन के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कई लोगों को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा। फिलहाल, पूरे प्रदेश में इस छापेमारी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और कई अन्य विभागीय अधिकारी भी जांच की जद में आने के डर से सतर्क हो गए हैं। आगामी कुछ दिनों में इस मामले में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना भी जताई जा रही है।