Himachal: अयोध्या चढ़ावा चोरी के विरोध में सड़कों पर उतरी हिमाचल कांग्रेस, मुख्यमंत्री सुक्खू ने बोला भाजपा पर हमला

शिमला। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान के सामान की चोरी का मामला अब उत्तर प्रदेश की सीमाओं से निकलकर पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर हिमाचल प्रदेश में सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। हिमाचल कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को प्रदेश की राजधानी शिमला में कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और इस कथित घोटाले के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व स्वयं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र की चुप्पी पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के साथ हिमाचल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार, राज्य मंत्रिमंडल के कई मंत्री और बड़ी संख्या में विधायक भी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में हुई यह चोरी केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों सनातनियों और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के साथ किया गया एक क्रूर मजाक है।

सड़क पर प्रदर्शन के बाद मंदिर में पूजा-अर्चना
शिमला की सड़कों पर अपना विरोध दर्ज कराने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और अन्य कांग्रेस नेता एक धार्मिक यात्रा के रूप में आगे बढ़े। प्रदर्शन का समापन करने के बाद सभी नेता सीधे शिमला के प्रसिद्ध राम बाजार स्थित राम मंदिर पहुंचे। वहां मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों ने भगवान राम के चरणों में शीश नवाया और विधिवत पूजा-अर्चना की। कांग्रेस नेताओं का यह कदम एक संदेश देने की कोशिश थी कि वे भी भगवान राम के प्रति उतनी ही श्रद्धा रखते हैं, जितनी कोई और।

राम मंदिर में दर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का काफिला जाखू की ओर बढ़ा। वहां उन्होंने हनुमान मंदिर में मत्था टेका और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस का यह ‘मंदिर कार्ड’ भाजपा की उस छवि को चुनौती देने के लिए है, जिसमें वह स्वयं को हिंदुत्व का एकमात्र संरक्षक बताती है।

भाजपा के मौन पर उठाए गंभीर सवाल
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखे प्रहार किए। पार्टी नेताओं का तर्क है कि भाजपा ने पिछले कई दशकों तक भगवान राम के नाम का इस्तेमाल केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने और चुनाव जीतने के लिए किया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जो पार्टी राम मंदिर के निर्माण का सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश करती रही, वही पार्टी आज मंदिर के भीतर हुए इतने बड़े चढ़ावा चोरी के मामले पर रहस्यमयी तरीके से मौन धारण किए हुए है।

कांग्रेस ने मांग की है कि चूंकि यह मामला करोड़ों भक्तों की भावनाओं और उनकी गाढ़ी कमाई के दान से जुड़ा है, इसलिए इसकी उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि दोषियों को बेनकाब करना और सजा दिलाना अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों शिमला में हुई कांग्रेस की एक उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का निर्णय लिया गया था, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है।

हिमाचल कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को इतनी आसानी से ठंडा नहीं होने देगी। आने वाले दिनों में इस आंदोलन को राज्य के अन्य जिलों और तहसीलों तक ले जाने की योजना है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस आक्रामक रुख ने भाजपा को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है। फिलहाल, हिमाचल की राजनीति में ‘राम मंदिर’ का मुद्दा एक नए और विवादित मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे आने वाले समय में टकराव और बढ़ने के आसार हैं। कांग्रेस अब जनता के बीच जाकर यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि वह धर्म और आस्था के अपमान के खिलाफ चुप नहीं रहेगी।

 

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