लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और निर्मित संपत्तियों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश कैबिनेट ने पंचायती राज विभाग द्वारा तैयार की गई “संचालन एवं अनुरक्षण नीति-2026” को अपनी औपचारिक स्वीकृति दे दी है। भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई यह नीति राज्य के गांवों की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में इस नीति के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि गांवों में स्वच्छता के लिए बनाई गई परिसंपत्तियां न केवल क्रियाशील रहें, बल्कि उनका वैज्ञानिक तरीके से रखरखाव भी हो। प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब ग्रामीण स्वच्छता ढांचे के संचालन के लिए इतने स्पष्ट और विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।
15.50 लाख परिसंपत्तियों का होगा कायाकल्प
इस नई नीति के लागू होने से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्थित लगभग 15.50 लाख से अधिक सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार आएगा। इनमें मुख्य रूप से गांवों की नालियां, सामुदायिक सेप्टिक टैंक और गोवर्धन प्लांट जैसी महत्वपूर्ण संरचनाएं शामिल हैं। अक्सर देखा गया है कि निर्माण के कुछ समय बाद रखरखाव के अभाव में ये संपत्तियां निष्क्रिय हो जाती हैं। अब नई नीति के तहत इनके नियमित अनुरक्षण और सुचारू संचालन के लिए प्रतिवर्ष लगभग 750 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने का प्रावधान किया गया है।
ओडीएफ प्लस लक्ष्यों की प्राप्ति पर जोर
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य गांवों को ‘खुले में शौच से मुक्त’ (ओडीएफ) बनाए रखने के साथ-साथ ‘ओडीएफ प्लस’ की स्थिति हासिल करना है। इसका अर्थ यह है कि अब केवल शौचालय निर्माण तक सीमित न रहकर ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (Solid and Liquid Waste Management) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह नीति पर्यावरणीय स्वच्छता को स्थायी बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जिससे ग्रामीण जनजीवन के स्वास्थ्य स्तर में सुधार होगा।
आय के साधन भी तलाशेगा विभाग
कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई इस नीति की एक बड़ी विशेषता इसका आर्थिक पक्ष है। सरकार केवल पैसा खर्च नहीं करेगी, बल्कि इन स्वच्छता सेवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आय के स्रोत भी सृजित करेगी। इसके तहत पंचायती राज विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में ‘डोर टू डोर’ कूड़ा कलेक्शन (घर-घर से कचरा उठाना) शुरू करेगा। साथ ही, कचरे से निकलने वाली खराब प्लास्टिक की बिक्री और अन्य अपशिष्ट पदार्थों के पुनर्चक्रण (रिसाइकिल) के माध्यम से राजस्व जुटाने की योजना भी इस नीति का अभिन्न हिस्सा है। इससे न केवल स्वच्छता बनी रहेगी, बल्कि पंचायतों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी।
इस नीति को लागू करने से पहले राज्य सरकार ने मसौदे में कई आवश्यक संशोधन किए हैं ताकि इसे व्यावहारिक बनाया जा सके। अब गांवों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित होगी और सेप्टिक टैंकों के प्रबंधन से भूजल प्रदूषण को रोकने में मदद मिलेगी। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘पूर्ण स्वच्छता’ का सपना साकार होने की उम्मीद बढ़ गई है। प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल गांवों को सुंदर बनाएगा बल्कि बीमारियों के खतरे को भी कम करेगा।