इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की कोशिशें अब एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचती नजर आ रही हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच दूसरे दौर की तकनीकी वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित हो सकती है। यह पहल दोनों देशों के बीच राजनयिक प्रक्रिया को पटरी पर बनाए रखने की जारी कोशिशों का एक अहम हिस्सा है।
राजनयिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य 18 जून को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत बनाए गए फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाना है। इससे पहले 21 जून को स्विट्जरलैंड में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में तकनीकी स्तर की शुरुआती बातचीत हुई थी, जिसने इस संवाद की आधारभूमि तैयार की थी।
इस्लामाबाद में जुटेंगे दोनों देशों के प्रतिनिधि
रिपोर्टों की मानें तो दूसरे दौर की इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए दो संभावित स्थानों पर चर्चा की गई थी, जिनमें स्विट्जरलैंड का बर्गनस्टॉक रिसॉर्ट और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद शामिल हैं। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों और कूटनीतिक रणनीतियों को देखते हुए इस्लामाबाद के चुने जाने की संभावना सबसे अधिक जताई जा रही है। यह वार्ता 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि अभी आयोजन स्थल पर अंतिम मुहर लगना शेष है।
इन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहेगी चर्चा
11 जुलाई को होने वाली इस प्रस्तावित बैठक का एजेंडा काफी व्यापक है। इसमें मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में स्थिरता बनाए रखने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों पक्ष अपनी राय साझा करेंगे।
वार्ता के मुख्य केंद्र बिंदु
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परमाणु कार्यक्रम: ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं का समाधान ढूंढना।
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आर्थिक प्रतिबंध: ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए प्रतिबंधों में ढील की संभावनाओं पर विचार।
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फ्रीज संपत्ति: दुनिया भर के बैंकों में रुकी हुई ईरानी धनराशि की वापसी का मार्ग प्रशस्त करना।
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क्षेत्रीय सुरक्षा: पश्चिम एशिया में शांति बहाली और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
60 दिनों का महत्वपूर्ण समय
इस पूरी प्रक्रिया की नींव दो हफ्ते पहले रखे गए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ पर टिकी है। इस समझौते के तहत अमेरिका और ईरान को अपने विवादित मुद्दों और परमाणु कार्यक्रम पर एक बड़े समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया था। 11 जुलाई की बैठक इसी समयसीमा के भीतर एक ठोस नतीजे पर पहुंचने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
पाकिस्तान और कतर इस पूरी प्रक्रिया में सेतु का कार्य कर रहे हैं। यदि इस्लामाबाद में होने वाली यह बातचीत सफल रहती है, तो यह न केवल अमेरिका और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के लिए, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगी। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें 11 जुलाई को होने वाली इस बैठक और इसके संभावित परिणामों पर टिकी हैं।
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