Himachal: कांगड़ा में ब्राह्मण राजनीति को धार देने के लिए राज्यसभा चुनाव में अनुराग शर्मा पर कांग्रेस का बड़ा दांव

बैजनाथ। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट के लिए कांग्रेस ने अनुराग शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाकर प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। अनुराग शर्मा का परिवार दशकों से कांग्रेस की विचारधारा और संगठन से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पिता प्यारे लाल शर्मा ने बैजनाथ पंचायत समिति के अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक कार्य किया था। प्यारे लाल शर्मा की गिनती पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कद्दावर नेता पंडित संतराम के सबसे भरोसेमंद करीबियों में होती थी। इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि ने अनुराग को राजनीति के गुण विरासत में दिए हैं।

अनुराग शर्मा के राजनीतिक सफर में कई दिलचस्प मोड़ आए हैं। एक समय में उन्हें धर्मशाला के वर्तमान विधायक सुधीर शर्मा का बेहद खास माना जाता था और दोनों की जुगलबंदी चर्चा में रहती थी। हालांकि, कुछ वर्ष पूर्व दोनों के बीच वैचारिक मतभेद बढ़े और दोस्ती में दरार आ गई। प्रदेश में सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार बनने से काफी पहले ही अनुराग शर्मा मुख्यमंत्री की कोर टीम के प्रमुख सदस्य बन चुके थे। उनकी निष्ठा और कार्यकुशलता को देखते हुए ही करीब दो महीने पहले उन्हें कांगड़ा जिला कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

कांगड़ा जिले की राजनीति में कांग्रेस के भीतर हमेशा से ब्राह्मण चेहरों का दबदबा रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र में पार्टी की पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू एक ऐसे चेहरे की तलाश में थे जो संगठन को नई ऊर्जा दे सके। अनुराग शर्मा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर मुख्यमंत्री ने न केवल ब्राह्मण समुदाय में पैठ बनाने की कोशिश की है, बल्कि सुधीर शर्मा के राजनीतिक प्रभाव के काट के रूप में भी एक संदेश दिया है।

अनुराग शर्मा का जन्म 29 अगस्त 1978 को बैजनाथ उपमंडल के बीड़ में हुआ था। उनकी शुरुआती राजनीति छात्र जीवन से ही शुरू हो गई थी। वे 1998 से 1999 तक गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कॉलेज बैजनाथ में एनएसयूआइ के कैंपस अध्यक्ष रहे। उन्होंने अपनी स्नातक की डिग्री भी बैजनाथ महाविद्यालय से ही प्राप्त की है। संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें 1996 से 2001 तक एनएसयूआइ का प्रदेश महासचिव बनाया गया था।

इसके पश्चात, 2002 से 2006 तक उन्होंने युवा कांग्रेस कांगड़ा के महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनकी सांगठनिक क्षमता के कारण उन्हें 2007 से 2012 तक ब्लॉक कांग्रेस महासचिव और 2014 से 2019 तक कांग्रेस के प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीति के अलावा अनुराग शर्मा का पर्यटन और साहसिक खेलों में भी बड़ा योगदान रहा है। वे 2010 से 2020 तक बीड़ पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के निदेशक रहे और वर्तमान में इसके अध्यक्ष हैं। बीड़ में पैराग्लाइडिंग विश्व कप के सफल आयोजन में उनकी भूमिका को काफी सराहा गया है। अब राज्यसभा के मैदान में उतरकर वे अपनी राजनीतिक पारी के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़े हैं।

 

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