Saudi-Arabia: क्षेत्रीय तनाव के बीच अजीत डोभाल का सऊदी अरब दौरा ऊर्जा सुरक्षा – The Hill News

Saudi-Arabia: क्षेत्रीय तनाव के बीच अजीत डोभाल का सऊदी अरब दौरा ऊर्जा सुरक्षा

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सऊदी अरब के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उत्पन्न बाधाओं के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रविवार को रियाद पहुंचने पर सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-साती ने अजीत डोभाल का भव्य स्वागत किया। इसके पश्चात डोभाल ने सऊदी अरब के प्रभावशाली नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठकों का सिलसिला शुरू किया।

भारतीय दूतावास द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अजीत डोभाल ने सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान और वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसैद अल-ऐबान से विस्तृत मुलाकात की। इन बैठकों का मुख्य एजेंडा द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाना, क्षेत्रीय सुरक्षा की वर्तमान स्थिति का आकलन करना और दोनों देशों के आपसी हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना रहा। डोभाल की इस यात्रा को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया में किसी भी तरह के बदलाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

भारत अपनी कुल तेल आवश्यकताओं का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से ही आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो तेल परिवहन के लिए एक प्रमुख समुद्री मार्ग है, वहां किसी भी प्रकार की रुकावट का अर्थ है वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों में अचानक उछाल और आपूर्ति में भारी कमी। इसी जोखिम को कम करने के लिए भारत प्रमुख तेल उत्पादक देशों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर रहा है और उत्पन्न परिस्थितियों पर पैनी नजर बनाए हुए है। एनएसए के इस दौरे का उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना भी है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका द्वारा हाल ही में एक ईरानी जहाज को जब्त किए जाने के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि जहाज ने बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इस सैन्य गतिविधि का तत्काल प्रभाव वैश्विक तेल बाजार पर देखा गया है, जहां ब्रेंट क्रूड की कीमतें अब 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की दरों में भी भारी उछाल दर्ज किया गया है।

तनाव की इस भयावह स्थिति के बीच शांति की उम्मीदें भी दिखाई दे रही हैं। चर्चा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक स्तर पर फिर से बातचीत शुरू हो सकती है। दोनों देशों के बीच इससे पहले पाकिस्तान में प्रथम दौर की वार्ता संपन्न हो चुकी है और अब दूसरे दौर के संवाद की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। अजीत डोभाल की इस सक्रियता और कूटनीतिक प्रयासों का उद्देश्य न केवल भारत के हितों की रक्षा करना है, बल्कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिशों को भी बल देना है।

 

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