नई दिल्ली। नेपाल में हुए आम चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। नेपाल के निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि मतगणना शुरू होने के शुरुआती 24 घंटों के भीतर 165 प्रत्यक्ष सीटों (एफपीटीपी) के परिणाम सार्वजनिक करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोग ने यह भी जानकारी दी कि पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मतपेटियों को मुख्य केंद्रों तक पहुँचाने में काफी समय लगता है, इसलिए अंतिम परिणाम आने में कुछ वक्त लग सकता है।
बीते गुरुवार को संपन्न हुए मतदान में नेपाल के योग्य मतदाताओं में से लगभग 60 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस चुनाव की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें कुल 65 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया और 3,400 से अधिक उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वर्तमान में जारी मतगणना के जो रुझान सामने आ रहे हैं, वे पारंपरिक राजनीति को एक बड़ा झटका देते नजर आ रहे हैं।
रुझानों में रैपर से राजनेता बने बालेन शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) एकतरफा बढ़त बनाती दिख रही है। आरएसपी फिलहाल 62 सीटों पर आगे चल रही है, जो नेपाल की नई पीढ़ी और युवा मतदाताओं के बीच बालेन शाह की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। वहीं, देश की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक नेपाली कांग्रेस मात्र 9 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और दूसरे स्थान पर चल रही है।
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल’ (यूएमएल) के लिए ये रुझान काफी निराशाजनक हैं, क्योंकि उनकी पार्टी केवल 3 से 4 सीटों पर ही आगे है। इसके अलावा श्रम शक्ति पार्टी भी एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। आरएसपी ने एक सीट पर अपनी पहली आधिकारिक जीत भी दर्ज कर ली है, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।
विशेष रूप से झापा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 5 की स्थिति काफी चर्चा में है, जहाँ बालेन शाह और केपी शर्मा ओली के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, कमल ग्रामीण नगरपालिका और गौरादहा ग्रामीण नगरपालिका के कुछ मतदान केंद्रों पर डाले गए 1,400 मतों में से बालेन शाह को 814 वोट मिले हैं। इसके विपरीत, केपी शर्मा ओली को केवल 384 वोटों से ही संतोष करना पड़ा है।
रुझानों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि नेपाल की जनता इस बार बदलाव के पक्ष में है। ‘जेन-जी’ के नायक के रूप में उभरे बालेन शाह की पार्टी ने दिग्गजों को पीछे छोड़कर एक नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। यदि यही रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं, तो नेपाल की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा। पारंपरिक और भारत विरोधी रुख रखने वाले नेताओं के पिछड़ने से पड़ोसी देशों की भी इस चुनाव पर पैनी नजर बनी हुई है। फिलहाल, मतगणना की प्रक्रिया जारी है और आरएसपी सरकार बनाने की ओर मजबूती से कदम बढ़ाती नजर आ रही है।
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