कोलकाता/नई दिल्ली। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव और अस्थिरता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को ‘असामान्य’ करार देते हुए कहा कि अभी यह अनुमान लगाना बेहद कठिन है कि आने वाले समय में स्थितियां क्या मोड़ लेंगी। उन्होंने आगाह किया कि ईरान और उसके विरोधियों के बीच चल रही तनातनी पूरी दुनिया के लिए एक बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट का कारण बन सकती है।
राजनाथ सिंह ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) और फारस की खाड़ी के सामरिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य या तकनीकी रुकावट आती है, तो इसका सीधा और विनाशकारी असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह पूरा इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में होने वाला जरा सा भी व्यवधान अंतरराष्ट्रीय व्यापार को पूरी तरह ध्वस्त कर सकता है, जिससे भारत सहित दुनिया के तमाम देशों की ऊर्जा जरूरतों पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
युद्ध के बदलते स्वरूप और आधुनिक तकनीक के हस्तक्षेप पर चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज का मुकाबला अब केवल भौगोलिक सीमाओं या जमीन तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने चिंता जताई कि विभिन्न देश अब जमीन, हवा और समुद्र के साथ-साथ अंतरिक्ष (स्पेस) में भी एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। तकनीक और हथियारों का यह विस्तार भविष्य के लिए एक अत्यंत कठिन और जटिल चुनौती पेश कर रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह से युद्ध की अवधारणाएं बदल रही हैं, वह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक नया और बड़ा खतरा है।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक बेहद गंभीर पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि इस तरह के निरंतर तनाव और असामान्य टकराव अब दुनिया के लिए ‘नया नॉर्मल’ (New Normal) बनते जा रहे हैं। यानी समाज और राष्ट्र इन भीषण अनिश्चितताओं को सहजता से स्वीकार करने लगे हैं, जो कि एक खतरनाक संकेत है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय और शांति की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखा जा सके। वर्तमान में पूरी दुनिया की निगाहें मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों पर टिकी हैं और भारत का यह आधिकारिक रुख वैश्विक परिप्रेक्ष्य में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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