काठमांडू। नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह शुक्रवार को जब एक लंबी छुट्टी के बाद काठमांडू लौटे, तो उनका स्वागत किसी भव्य समारोह की तरह हुआ। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच काठमांडू हवाई अड्डे पर उनके उतरते ही सैकड़ों समर्थक वहां जमा हो गए और नेपाल में दोबारा राजशाही बहाल करने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। समर्थकों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था, “हमें अपने राष्ट्र को बचाने के लिए नरेश की वापसी चाहिए।” नेपाल में साल 2008 में राजतंत्र को समाप्त कर गणतंत्र की स्थापना की गई थी, लेकिन वर्तमान में देश की आर्थिक बदहाली और निरंतर राजनीतिक अस्थिरता ने एक बार फिर राजशाही के पक्ष में माहौल बना दिया है।
हवाई अड्डे के बाहर राजतंत्र समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेता कमल थापा, नवराज सुबेदी और चर्चित चिकित्सक दुर्गा प्रसाई के नेतृत्व में समर्थकों का भारी जमावड़ा सुबह से ही लगा हुआ था। दुर्गा प्रसाई ने एक प्रेस वार्ता के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि उनका लक्ष्य आगामी मार्च में होने वाले आम चुनावों से पहले देश में राजतंत्र को दोबारा स्थापित करना है। समर्थकों का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व देश की समस्याओं को सुलझाने में पूरी तरह विफल रहा है और केवल राजशाही ही नेपाल को एकता के सूत्र में बांध सकती है।
जब पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह तीन महीने के अंतराल के बाद पूर्वी नेपाल से अपने घर लौटे, तो समर्थकों ने “राजा आओ और देश बचाओ” के गगनभेदी नारों के साथ उनका अभिवादन किया। समर्थकों ने उन्हें फूलों के गुलदस्ते भेंट किए और राष्ट्रीय ध्वज लहराकर अपना समर्थन व्यक्त किया। प्रदर्शन में शामिल सनातन प्रसाद रेगमी ने कहा कि नेपाल को अब एक ऐसे अभिभावक की जरूरत है जो सभी नागरिकों का समान रूप से ख्याल रख सके, और यह जिम्मेदारी केवल राजा ही निभा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्ट राजनेताओं ने देश की साख को भारी नुकसान पहुँचाया है।
नेपाल में पिछले एक साल से राजशाही समर्थक आंदोलन ने फिर से जोर पकड़ लिया है। देश की गिरती अर्थव्यवस्था और बार-बार बदलती सरकारों से जनता का एक बड़ा हिस्सा असंतुष्ट नजर आ रहा है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि राजशाही के दौर में देश अधिक स्थिर और सुरक्षित था। हालांकि, नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दल अभी भी गणतंत्र के पक्ष में हैं, लेकिन सड़कों पर बढ़ती भीड़ और पूर्व नरेश के प्रति बढ़ता आकर्षण यह संकेत दे रहा है कि मार्च के चुनावों से पहले नेपाल की राजनीति में बड़ा वैचारिक संघर्ष देखने को मिल सकता है। फिलहाल, पूर्व नरेश के आगमन ने काठमांडू के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है।