चंडीगढ़। पाकिस्तान के लाहौर में स्थित प्रसिद्ध एचिसन कॉलेज के परिसर से एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। मॉल रोड पर स्थित इस प्रतिष्ठित कॉलेज में बने पुरातन गुरुद्वारा साहिब में शुक्रवार को वर्षों बाद शबद कीर्तन की गूंज सुनाई दी और विशेष अरदास की गई। साल 1947 में भारत विभाजन के बाद से यह धार्मिक स्थल वीरान पड़ा था, जहाँ अब जाकर पवित्र कीर्तन का आयोजन हुआ।
इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा सहित स्थानीय सिख संगत और कई गणमान्य हस्तियां वहां मौजूद थीं। इस कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. तरुणजीत सिंह बुतालिया ने कॉलेज प्रशासन के साथ मिलकर तैयार की थी। गुरुद्वारा साहिब में अरदास और कीर्तन के दौरान माहौल काफी भावुक हो गया, क्योंकि दशकों की लंबी खामोशी के बाद यहाँ फिर से सिख रीतियों का पालन किया गया।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 1947 में हुए बंटवारे के बाद जब सिख छात्र कॉलेज छोड़कर चले गए, तो संगत की कमी के कारण इस गुरुद्वारे में सेवा बंद हो गई थी। हालांकि, अच्छी बात यह रही कि कॉलेज प्रशासन ने पिछले कई दशकों से इस धार्मिक इमारत की देखरेख जारी रखी और इसके स्वरूप को कोई नुकसान नहीं पहुँचने दिया। यही कारण है कि आज भी यह गुरुद्वारा अपनी पूरी भव्यता के साथ वहां खड़ा है।
यह विशेष आयोजन एचिसन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया गया। इस कॉलेज का अपना एक अलग और गौरवशाली इतिहास रहा है। इसकी आधारशिला 3 नवंबर 1886 को रखी गई थी। उस दौर में इस संस्थान की स्थापना अविभाजित पंजाब के राजघरानों, शाही परिवारों और प्रतिष्ठित घरानों के बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा देने के लिए की गई थी। आज भी इस कॉलेज को दक्षिण एशिया के सबसे बेहतरीन शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है।
कॉलेज परिसर में बना यह गुरुद्वारा स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना है। इस गुरुद्वारे की डिजाइन और वास्तुकला को उस समय के मशहूर सिख वास्तुकार राम सिंह ने तैयार किया था। राम सिंह का नाम कला और स्थापत्य की दुनिया में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। वे उस काल के मशहूर मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स के साथ जुड़े हुए थे, जिसे वर्तमान में पाकिस्तान में नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट्स के नाम से जाना जाता है। इस ऐतिहासिक कीर्तन और अरदास ने न केवल पुरानी यादों को ताजा किया है, बल्कि यह आपसी सद्भाव और साझा विरासत के प्रति सम्मान की एक नई मिसाल भी पेश करता है।