धर्मशाला। पेंपा सेरिंग एक बार फिर निर्वासित तिब्बती सरकार की कमान संभालेंगे। निर्वासित तिब्बती चुनाव आयोग ने आधिकारिक रूप से उनके लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री (सिक्योंग) चुने जाने की घोषणा कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त लोबसांग यशी ने बताया कि पेंपा सेरिंग ने पहले ही चरण के मतदान में भारी बहुमत हासिल कर अपनी जीत सुनिश्चित की है। गौरतलब है कि निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री और 18वीं संसद के सदस्यों के चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 1 फरवरी को हुआ था।
निर्वासित तिब्बती चुनाव प्रणाली के विशिष्ट नियमों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार प्रारंभिक दौर में ही कुल मतों का 60 प्रतिशत से अधिक हासिल कर लेता है, तो वह सीधे विजेता घोषित हो जाता है और उस पद के लिए दूसरे चरण के मतदान की आवश्यकता नहीं रहती। पेंपा सेरिंग ने इस चुनाव में कुल 61.025 प्रतिशत मत प्राप्त किए, जिसके आधार पर उन्हें निर्वाचित घोषित किया गया। प्रधानमंत्री पद की इस दौड़ में कुल 103 उम्मीदवार मैदान में थे और दुनिया भर के 51,140 तिब्बतियों ने इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी केलसांग दोरजी को 17,843 और सेरिंग फुंटसोक को मात्र 159 वोट मिले।
पेंपा सेरिंग का यह लगातार दूसरा कार्यकाल होगा। इससे पहले वे 2021 में पहली बार प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए थे। तिब्बती निर्वासित सरकार के इतिहास में प्रोफेसर सामदोंग रिनपोछे (2001-2011) और डॉ. लोबसांग सांग्ये (2011-2021) भी 10-10 वर्षों तक इस प्रतिष्ठित पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पेंपा सेरिंग की इस जीत को तिब्बती समुदाय के बीच उनके प्रति बढ़ते विश्वास और उनके पिछले कार्यों की सराहना के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री पद का चुनाव संपन्न होने के बाद अब चुनाव आयोग का पूरा ध्यान निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्यों के चुनाव पर है। संसद सदस्यों के लिए दूसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल को निर्धारित किया गया है। चुनाव आयोग ने तिब्बत के तीन पारंपरिक प्रांतों से 30-30 उम्मीदवारों का चयन किया है। इसके अलावा तिब्बती बौद्ध धर्म के विभिन्न संप्रदायों, उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से भी प्रतिनिधि चुने जाएंगे। जो उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, वे 28 फरवरी तक लिखित अनुरोध दे सकते हैं, जबकि अन्य उम्मीदवारों को 27 फरवरी तक अपनी उम्मीदवारी की पुष्टि करनी होगी। पेंपा सेरिंग के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के साथ ही तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन और समुदाय के कल्याणकारी कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।