Uttarakhand: पलायन रोकने और सीमांत क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कसी कमर – The Hill News

Uttarakhand: पलायन रोकने और सीमांत क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कसी कमर

देहरादून। उत्तराखंड में पलायन की समस्या को जड़ से समाप्त करने और सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना (MPRY) और मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MBADP) की अनुवीक्षण समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पलायन रोकने और सीमांत क्षेत्रों में आजीविका के अवसर पैदा करने वाली योजनाओं को लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी या कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्य सचिव ने बैठक में कहा कि जनपदों से जो भी प्रस्ताव आ रहे हैं, उन्हें स्वीकृत करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और सभी कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने पिछली योजनाओं की समीक्षा करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन गांवों में ये दोनों योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उन्हें स्वरोजगार और आजीविका के मामले में एक मिसाल के तौर पर विकसित किया जाए, ताकि वे अन्य सीमांत गांवों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकें।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने ‘टारगेटेड अप्रोच’ यानी लक्ष्य आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों में उपलब्ध संसाधनों और वहां मौजूद कमियों का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया जाना चाहिए। इसी अध्ययन के आधार पर योजनाओं को धरातल पर उतारा जाए ताकि स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और वहां की वास्तविक जरूरतों को पूरा किया जा सके।

आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने जानकारी दी कि इन योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव दिखने लगे हैं, लेकिन इन्हें और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत 12 जिलों में 90 नई योजनाएं प्रस्तावित हैं। वहीं, मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 5 सीमांत जिलों के चयनित विकासखंडों में 155 परियोजनाओं पर कार्य किया जाना है। मुख्य सचिव ने इन सभी कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना उत्तराखंड के उन 474 गांवों पर केंद्रित है, जहां 50 प्रतिशत तक पलायन हो चुका है। इसका मुख्य उद्देश्य वहां रह रहे परिवारों, बेरोजगार युवाओं और वापस लौटे प्रवासियों (रिवर्स माइग्रेंट्स) को स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार उपलब्ध कराना है। दूसरी ओर, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के जरिए पांच सीमांत जिलों के सीमांत विकासखंडों में सतत आजीविका के संसाधन विकसित किए जा रहे हैं ताकि पलायन रुके और लोग अपने गांवों की ओर वापस लौटें।

इस उच्चस्तरीय बैठक में सचिव सचिन कुर्वे, डी.एस. गब्रियाल, विशेष सचिव निवेदिता कुकरेती, अपर सचिव अनुराधा पाल, झरना कमठान और वन विभाग के हॉफ रंजन कुमार मिश्र सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि सीमांत क्षेत्रों का विकास न केवल आर्थिकी बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

 

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