नई दिल्ली। वेनेजुएला में हुए नाटकीय तख्तापलट को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अब एक और कैरेबियन देश क्यूबा की ओर अपनी नजरें टिका दी हैं। ट्रंप द्वारा क्यूबा पर संभावित सैन्य हमले की सीधी धमकी दिए जाने के बाद वहां के हालात तेजी से बिगड़ने लगे हैं। युद्ध की आशंका और भविष्य की अनिश्चितता के कारण क्यूबा के आम नागरिकों में भारी डर और अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त है। राजधानी हवाना सहित देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल पंपों और राशन की दुकानों पर लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, क्योंकि लोग बुनियादी जरूरतों का स्टॉक करने की कोशिश कर रहे हैं।
डोनल्ड ट्रंप की इस नई कूटनीतिक और सैन्य चाल के पीछे वेनेजुएला का आर्थिक समीकरण सबसे बड़ी वजह है। ऐतिहासिक रूप से वेनेजुएला, क्यूबा का सबसे बड़ा तेल और आर्थिक सहायता प्रदाता रहा है। ट्रंप का मानना है कि चूंकि अब वेनेजुएला की सत्ता पर अमेरिका का परोक्ष नियंत्रण हो चुका है, इसलिए क्यूबा को मिलने वाली तेल की आपूर्ति और वित्तीय मदद बहुत जल्द बंद हो जाएगी। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि जैसे ही वेनेजुएला से मिलने वाला समर्थन रुकेगा, क्यूबा की मौजूदा सरकार आर्थिक संकट के बोझ तले दबकर अपने आप गिर जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्यूबा को एक स्पष्ट अल्टीमेटम जारी किया है। याद दिला दें कि 3 जनवरी 2025 को अमेरिकी सेना ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर धावा बोला था। इस हमले के दौरान वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना के बाद से ही डोनल्ड ट्रंप लगातार क्यूबा पर दबाव बना रहे हैं और सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहे हैं। ट्रंप ने अपने हालिया बयानों में कहा है कि क्यूबा में बहुत जल्द तख्तापलट होने वाला है क्योंकि उनकी सरकार पतन के बेहद करीब है।
वेनेजुएला के ताजा हालातों पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि वहां अब उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया गया है। ट्रंप के अनुसार, वेनेजुएला की यह नई सरकार अब पूरी तरह से वाशिंगटन के निर्देशों और अमेरिकी हितों के अनुरूप कार्य करेगी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की इस कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना भी हो रही है। अमेरिकी मानवाधिकार संगठनों ने भी काराकास पर किए गए अमेरिकी हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन और किसी देश की संप्रभुता पर सीधा प्रहार करार दिया है।
इन तमाम दबावों और धमकियों के बावजूद क्यूबा ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। डोनल्ड ट्रंप ने क्यूबा के नेतृत्व के सामने एक समझौते का प्रस्ताव रखा था, लेकिन क्यूबा के राष्ट्रपति ने इसे सिरे से ठुकरा दिया। क्यूबा के नेतृत्व ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे अमेरिका की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और न ही किसी बाहरी शक्ति के सामने घुटने टेकेंगे। उन्होंने अमेरिका पर जबरन दबाव बनाने और छोटे देशों की स्वायत्तता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है।
युद्ध की आहट और संभावित हवाई हमलों की अटकलों के बीच क्यूबा की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन वहां के नागरिकों और सरकार का तेवर संघर्ष के लिए तैयार नजर आ रहा है। लोग राशन और ईंधन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो आने वाले मानवीय संकट की ओर इशारा करता है। फिलहाल, कैरेबियन क्षेत्र में बढ़ते इस तनाव ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा है और कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब यह देखना होगा कि अमेरिका अपनी धमकी को हकीकत में बदलता है या क्यूबा की दृढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ट्रंप के इरादों को बदल पाती है।
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