Uttarakhand: उत्तराखंड में शहरी स्वच्छता और सुशासन को नई गति मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त सफाई निरीक्षकों को सौंपे नियुक्ति पत्र

देहरादून। उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार प्रदान करने और नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहरी विकास विभाग के अंतर्गत लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित 63 सफाई निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने न केवल युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की, बल्कि प्रदेश के विकास और स्वच्छता से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से योग्य युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना है और इसी कड़ी में पिछले चार वर्षों के भीतर राज्य के लगभग 30 हजार युवाओं को विभिन्न विभागों में सरकारी नौकरियां प्रदान की जा चुकी हैं।

शहरी विकास निदेशालय के नवीन भवन का शिलान्यास
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आधुनिक बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए शहरी विकास निदेशालय के नवीन भवन का वर्चुअल माध्यम से शिलान्यास किया। लगभग 62 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिससे विभाग के प्रशासनिक कार्यों में अधिक गति और पारदर्शिता आएगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब कार्यस्थल सुविधायुक्त और आधुनिक होते हैं, तो कर्मचारियों की कार्यक्षमता में भी सकारात्मक वृद्धि होती है। इसके साथ ही, स्वच्छता अभियान को मजबूती प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री ने कूड़ा निस्तारण से जुड़े आधुनिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वाहन प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगे।

नगरीय निकायों का विस्तार और बढ़ती चुनौतियां
सफाई निरीक्षकों को संबोधित करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के गठन से लेकर अब तक के सफर को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जब उत्तराखंड राज्य बना था, तब प्रदेश में केवल 63 स्थानीय नगर निकाय हुआ करते थे। लेकिन विकास की गति और बढ़ती आबादी के साथ आज प्रदेश में कुल 108 स्थानीय नगर निकाय क्रियाशील हैं। इनमें 11 नगर निगम, 46 नगर पालिका परिषद और 51 नगर पंचायतें शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आंकड़े इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि उत्तराखंड के शहर अब आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र बन चुके हैं। निकायों की संख्या बढ़ने के साथ ही वहां जन सुविधाओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। सफाई निरीक्षक इन निकायों की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं।

प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता का सुदृढ़ीकरण
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार पिछले पांच वर्षों से नगर निकायों की प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता को बढ़ाने के लिए निरंतर भर्तियां कर रही है। अब तक निकायों में 63 अधिशासी अधिकारियों, 22 कर एवं राजस्व निरीक्षकों और 32 अवर अभियंताओं (जूनियर इंजीनियर्स) की नियुक्ति की जा चुकी है। अब 63 नए सफाई निरीक्षकों के जुड़ने से जमीन पर स्वच्छता कार्यों की निगरानी और बेहतर हो सकेगी। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने पद की गरिमा को समझें और निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करें ताकि जनता का विश्वास नगर निकायों पर बना रहे।

चारधाम यात्रा और कुंभ मेले की तैयारी
उत्तराखंड की आध्यात्मिक और पर्यटन महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था में तीर्थाटन का बड़ा योगदान है। अगले महीने से विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा प्रारंभ होने वाली है और वर्ष 2027 में हरिद्वार में भव्य कुंभ मेले का आयोजन होना है। इन आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालु देवभूमि में आते हैं। ऐसे में शहरों और तीर्थस्थलों की स्वच्छता बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी है। इसमें सफाई निरीक्षकों और नगर निकायों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार चाहती है कि जब भी कोई श्रद्धालु उत्तराखंड आए, तो वह यहां की पवित्रता और स्वच्छता की एक सुखद स्मृति लेकर लौटे।

स्वच्छता और आधुनिक सुविधाओं के लिए सरकारी योजनाएं
पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि राज्य सरकार शहरों को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए कई मिशनों पर एक साथ काम कर रही है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ठोस कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन और प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना जैसी जनहितकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। शहरों को ‘ओडीएफ’ (खुले में शौच मुक्त) बनाने के साथ-साथ ‘लीगेसी वेस्ट’ (पुराने कूड़े के ढेर) के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए भी प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

शहरी नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए ‘अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ स्थापित किए गए हैं। कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन बनाए गए हैं और कूड़ा वाहनों की पल-पल की जानकारी के लिए ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया गया है और 11 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।

स्वच्छता सेनानियों का सम्मान और रैंकिंग में सुधार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने स्वच्छता कार्यों में दिन-रात जुटे रहने वाले पर्यावरण मित्रों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने बताया कि सरकार इन कर्मियों को ‘स्वच्छता सेनानी सम्मान’ के माध्यम से प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग में उत्तराखंड को अभी और लंबी दूरी तय करनी है। उन्होंने अधिकारियों और नवनियुक्त सफाई निरीक्षकों से आह्वान किया कि वे मिशन मोड में काम करें ताकि आगामी सर्वेक्षणों में उत्तराखंड के शहर देश के शीर्ष पायदान पर नजर आएं।

इस गरिमामयी अवसर पर विधायक खजान दास, बंशीधर भगत, उमेश शर्मा काऊ और सविता कपूर ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में शहरी विकास सचिव नितेश झा, शहरी विकास निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी और देहरादून की नगर आयुक्त नमामि बंसल सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद नवनियुक्त सफाई निरीक्षकों के चेहरों पर उत्साह और सेवा का संकल्प साफ दिखाई दे रहा था।

 

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