देहरादून। उत्तराखंड के सपूत और भारतीय सैन्य इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय, देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत की जयंती के अवसर पर आज समूचे प्रदेश ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी देहरादून स्थित अपने शासकीय आवास पर जनरल बिपिन रावत को नमन किया। मुख्यमंत्री ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी और राष्ट्र के प्रति उनके अतुलनीय योगदान का स्मरण किया। मुख्यमंत्री का यह संबोधन और श्रद्धांजलि न केवल एक व्यक्तिगत सम्मान था, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड की ओर से अपने उस महान योद्धा के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति थी, जिसने वैश्विक स्तर पर देवभूमि का मान बढ़ाया।
राष्ट्रभक्ति और अदम्य साहस के प्रतीक
पुष्कर सिंह धामी ने जनरल बिपिन रावत के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल एक सैन्य अधिकारी नहीं थे, बल्कि मां भारती की सेवा के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस के जीवंत प्रतीक थे। मुख्यमंत्री के अनुसार, जनरल बिपिन रावत ने अपना सम्पूर्ण जीवन देश की सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उनके भीतर कूट-कूट कर भरी राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा उन्हें अन्य सैन्य नेतृत्वकर्ताओं से अलग बनाती थी। पुष्कर सिंह धामी ने भावुक स्वर में कहा कि जनरल बिपिन रावत का जाना देश के लिए एक ऐसी क्षति थी जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन उनके द्वारा स्थापित आदर्श आज भी हम सभी के बीच जीवित हैं।
उत्तराखंड का गौरव और प्रेरणा के स्रोत
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जनरल बिपिन रावत उत्तराखंड की वीर परंपरा के सबसे बड़े ध्वजवाहक थे। उत्तराखंड को ‘वीरभूमि’ और ‘सैन्य धाम’ के रूप में जाना जाता है, और जनरल बिपिन रावत ने अपनी मेहनत, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता से इस पहचान को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनरल बिपिन रावत की सफलता की कहानी उत्तराखंड के हर छोटे गांव और कस्बे में रहने वाले युवाओं के लिए एक मशाल की तरह है। वे यह संदेश देते हैं कि यदि संकल्प दृढ़ हो और राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव हो, तो पर्वत जैसा ऊंचा लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने उन्हें उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि प्रदेश की आने वाली पीढ़ियां हमेशा उनके पदचिह्नों पर चलने का प्रयास करेंगी।
प्रथम सीडीएस के रूप में दूरदर्शी नेतृत्व
देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में जनरल बिपिन रावत की भूमिका का उल्लेख करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने उनकी दूरदर्शिता की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में जनरल बिपिन रावत ने जो कार्य किए, वे ऐतिहासिक हैं। उनकी रणनीतिक समझ और कठिन निर्णय लेने की क्षमता ने भारतीय रक्षा तंत्र को एक नई दिशा प्रदान की। मुख्यमंत्री के अनुसार, जनरल बिपिन रावत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए जो खाका तैयार किया था, वह आज भी भारत को सामरिक रूप से सशक्त बना रहा है। उनके नेतृत्व में देश ने सुरक्षा के मोर्चे पर कई ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जिन्होंने दुनिया को भारत की बढ़ती ताकत का अहसास कराया।
पद्म विभूषण से अलंकृत व्यक्तित्व का सम्मान
जनरल बिपिन रावत को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था, जो उनके द्वारा राष्ट्र को दी गई सेवाओं का एक सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह सम्मान उनके उस साहस और बलिदान का प्रतिफल है, जो उन्होंने अंतिम सांस तक देश के लिए दिया। जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री ने उनके जीवन संघर्ष को याद करते हुए कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च सैन्य पद तक पहुँचने की उनकी यात्रा हर भारतीय को गौरवान्वित करती है। उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते समय मुख्यमंत्री का चेहरा उनकी स्मृतियों के प्रति गहरा सम्मान प्रकट कर रहा था।
आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि जनरल बिपिन रावत का जीवन दर्शन केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने कहा कि जनरल बिपिन रावत ने सदैव यह सिखाया कि राष्ट्र हित से ऊपर कुछ भी नहीं है। उनकी स्पष्टवादिता, निडरता और देश के प्रति अटूट प्रेम आने वाले समय में लाखों युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी का यह दायित्व है कि हम जनरल बिपिन रावत के सपनों के अनुरूप एक सशक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
अंत में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त प्रदेशवासियों की ओर से जनरल बिपिन रावत को पुन: श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देवभूमि के इस महान नायक का नाम इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अंकित हो गया है। उनके महान कार्यों और त्याग को युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित यह संक्षिप्त लेकिन गरिमामयी कार्यक्रम जनरल बिपिन रावत की यादों और उनके द्वारा छोड़ी गई महान विरासत को समर्पित रहा। इस दौरान उपस्थित अन्य जनों ने भी नम आंखों से देश के पहले सीडीएस को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जनरल बिपिन रावत की जयंती का यह दिन उत्तराखंड के लिए अपनी सैन्य विरासत पर गर्व करने और राष्ट्र रक्षा के संकल्प को दोहराने का दिन बन गया है।