Delhi: संसद के बजट सत्र का राष्ट्रपति मुर्मु के संबोधन से विजन 2047 की दिखी झलक – The Hill News

Delhi: संसद के बजट सत्र का राष्ट्रपति मुर्मु के संबोधन से विजन 2047 की दिखी झलक

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र 2026-27 की औपचारिक शुरुआत बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के ओजस्वी संबोधन के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने सरकार की आगामी प्राथमिकताओं, पिछले दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और भारत के भविष्य की दिशा को स्पष्ट रूप से राष्ट्र के सामने रखा। यद्यपि सत्र की शुरुआत विपक्ष के भारी हंगामे के बीच हुई, लेकिन राष्ट्रपति ने अपने भाषण में सामाजिक न्याय, आर्थिक सुधार, अंतरिक्ष विज्ञान, क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

दो चरणों में संपन्न होगा महत्वपूर्ण बजट सत्र
इस वर्ष का बजट सत्र दो अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सत्र का पहला चरण बुधवार से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा। इसके पश्चात एक छोटे अवकाश के बाद, दूसरा चरण 9 मार्च को प्रारंभ होगा और 2 अप्रैल तक चलेगा। इस दूसरे चरण में मुख्य रूप से बजट प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा और मंत्रालयों के अनुदान मांगों पर विचार किया जाएगा। पूरे सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें होना प्रस्तावित हैं।

निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, 29 जनवरी को सरकार संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण (इकनॉमिक सर्वे) पेश करेगी, जो देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति का खाका पेश करेगा। इसके बाद, 1 फरवरी (रविवार) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार आठवां आम बजट पेश करेंगी। इस बजट से देश के मध्यम वर्ग, किसानों और उद्योग जगत को काफी उम्मीदें हैं।

सामाजिक न्याय और गरीबी उन्मूलन पर राष्ट्रपति का जोर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की सामाजिक न्याय के प्रति अडिग प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान में देश के लगभग 95 करोड़ नागरिक किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना का सीधा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष गर्व व्यक्त किया कि पिछले 10 वर्षों के दौरान सरकार की जनहितकारी नीतियों के कारण करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के तीसरे कार्यकाल का मुख्य लक्ष्य गरीबों को और अधिक सशक्त बनाना और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के माध्यम से सार्वजनिक धन की पाई-पाई का सदुपयोग सुनिश्चित करना है।

अंतरिक्ष और तकनीक में भारत की बढ़ती धमक
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने घोषणा की कि भारत अब अपने स्वयं के स्पेस स्टेशन के निर्माण की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है। गगनयान मिशन की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब अंतरिक्ष पर्यटन सामान्य भारतीयों की पहुँच में होगा।

पूर्वी भारत और समावेशी विकास का रोडमैप
क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के सरकार के प्रयासों की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पूर्वी भारत का विकास वर्तमान शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक इकाइयों और रोजगार के नए अवसरों को सृजित करने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं। सरकार का मानना है कि जब तक पूर्वी भारत प्रगति की मुख्यधारा से नहीं जुड़ता, तब तक पूर्ण विकास का लक्ष्य अधूरा है।

आर्थिक सुधार और रोजगार सृजन
राष्ट्रपति ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उठाए जा रहे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ जैसे कदमों की सराहना की। उन्होंने बताया कि देश में वर्तमान में 150 वंदे भारत ट्रेनें सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं, जो भारत के आधुनिक होते रेल बुनियादी ढांचे का प्रमाण हैं। उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों के लिए क्रांतिकारी बताया और कहा कि इससे युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।

पिछड़े वर्गों के कल्याण और महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए राष्ट्रपति ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के साहस, संकल्प और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की क्षमता को सिद्ध किया है। राष्ट्रपति के इस संबोधन ने यह साफ कर दिया है कि सरकार आने वाले समय में कड़े आर्थिक और सामाजिक सुधारों की दिशा में और अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ेगी।

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