नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन ने आखिरकार जेफरी एपस्टीन से जुड़ी जांच में सहयोग करने का फैसला किया है। लंबे समय तक टालमटोल करने के बाद, अब यह शक्तिशाली दंपती अमेरिकी हाउस के सामने पेश होने और कांग्रेस की जांच में अपनी गवाही देने के लिए सहमत हो गया है। यह निर्णय केवल स्वैच्छिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे कानूनी मजबूरी और गिरफ्तारी जैसा बड़ा खतरा भी छिपा हुआ था। दरअसल, यदि वे गवाही देने के लिए तैयार नहीं होते, तो उन पर सदन की अवमानना का मुकदमा चल सकता था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और कानूनी स्थिति दोनों संकट में पड़ सकती थी।
यह पूरा मामला कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के काले कारनामों की जांच से जुड़ा हुआ है। एपस्टीन की साल 2019 में हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही उसके साम्राज्य और उससे जुड़े रसूखदार लोगों की जांच तेज हो गई है। एपस्टीन कोई साधारण अपराधी नहीं था; उसके संपर्क दुनिया भर के अरबपति कारोबारियों, शीर्ष राजनेताओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी हस्तियों से थे। जांच एजेंसियां और अमेरिकी कांग्रेस इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं कि एपस्टीन के इस अवैध नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और उसे किन लोगों का संरक्षण प्राप्त था। बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन का नाम इस जांच के केंद्र में इसलिए है क्योंकि अतीत में उनके एपस्टीन के साथ पुराने संबंधों और मुलाकातों के कई दावे सामने आए हैं।
क्लिंटन परिवार के इस महत्वपूर्ण फैसले की पुष्टि उनके आधिकारिक प्रवक्ता एंजेल उरेना ने की है। एंजेल उरेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पेश होंगे। उन्होंने अपने बयान में यह भी तर्क दिया कि दोनों दिग्गज नेता वहां मौजूद रहेंगे क्योंकि वे एक ऐसी मिसाल कायम करना चाहते हैं जो भविष्य में सभी के लिए एक समान रूप से लागू हो सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘मिसाल कायम करने’ वाली बात केवल एक राजनीतिक आवरण है, जबकि असल वजह वह कानूनी दबाव है जो हाउस ओवरसाइट कमिटी द्वारा बनाया गया था।
गौरतलब है कि यह समझौता उस समय हुआ जब अमेरिकी हाउस में क्लिंटन दंपती के खिलाफ अवमानना प्रस्ताव (कंटेंप्ट रेजोल्यूशन) पर मतदान होने ही वाला था। हाउस ओवरसाइट कमिटी ने पिछले सप्ताह बहुत कड़ा रुख अपनाते हुए इन दोनों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की सिफारिश की थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इस सिफारिश को न केवल रिपब्लिकन सदस्यों का समर्थन मिला, बल्कि कुछ डेमोक्रेट्स ने भी इसके पक्ष में अपनी आवाज उठाई। यदि यह अवमानना प्रस्ताव सदन से पारित हो जाता, तो बिल और हिलेरी क्लिंटन को आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ता, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। इसी कानूनी पेचीदगी और संभावित जेल या जुर्माने की सजा से बचने के लिए उन्होंने गवाही देने का रास्ता चुना।
इससे पहले के घटनाक्रम पर नजर डालें तो क्लिंटन दंपती ने शुरू में सदन द्वारा भेजे गए समन को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। उनके वकीलों ने तर्क दिया था कि ये समन कानूनी रूप से वैध नहीं हैं क्योंकि इनके पीछे कोई स्पष्ट विधायी उद्देश्य नजर नहीं आता। समन की अवहेलना करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर पेश होने के बजाय लिखित शपथ-पत्र जमा कराए थे। इन लिखित दस्तावेजों में उन्होंने एपस्टीन और उसकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल के बारे में अपनी जानकारी साझा करने की कोशिश की थी, लेकिन जांच समिति केवल लिखित जवाबों से संतुष्ट नहीं थी और उन्हें आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करना चाहती थी।
बिल क्लिंटन ने अपने पुराने बयानों में यह स्वीकार किया है कि साल 2000 के शुरुआती दशक में उन्होंने ‘क्लिंटन फाउंडेशन’ के सामाजिक और मानवीय कार्यों के सिलसिले में जेफरी एपस्टीन के निजी जेट विमान का उपयोग किया था। हालांकि, उन्होंने हमेशा इस बात का पुरजोर खंडन किया है कि वे कभी एपस्टीन के उस कुख्यात निजी द्वीप पर गए थे, जहाँ कथित तौर पर अवैध गतिविधियां संचालित होती थीं। दूसरी ओर, हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि उनकी एपस्टीन के साथ कभी कोई विशेष या गहरी बातचीत नहीं हुई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वे कभी एपस्टीन के निजी जेट पर सवार नहीं हुईं और न ही उस निजी द्वीप से उनका कोई लेना-देना रहा है।
अब जब दोनों गवाही देने के लिए राजी हो गए हैं, तो अमेरिकी राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने की संभावना है। यह पूछताछ बंद कमरे में होगी या सार्वजनिक, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है, लेकिन उनकी गवाही एपस्टीन मामले की कई अनसुलझी कड़ियों को जोड़ने में मददगार साबित हो सकती है। जांच समिति के सदस्य यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या इन मुलाकातों और यात्राओं के पीछे केवल व्यापारिक या सामाजिक कारण थे, या इसके पीछे कुछ और भी छिपा हुआ था। यह मामला केवल एक दंपती की गवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी परीक्षण है कि क्या अमेरिकी कानून के सामने बड़े से बड़ा राजनेता भी जवाबदेह है। आने वाले दिनों में जब बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन सदन के सामने खड़े होंगे, तो पूरी दुनिया की नजरें उन पर टिकी होंगी कि वे एपस्टीन के रहस्यों से किस तरह पर्दा उठाते हैं।
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