Afganistan: अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर तालिबान का नया प्रहार अब गर्भनिरोधक दवाओं पर भी लगी पूर्ण पाबंदी – The Hill News

Afganistan: अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर तालिबान का नया प्रहार अब गर्भनिरोधक दवाओं पर भी लगी पूर्ण पाबंदी

नई दिल्ली। अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद से तालिबान प्रशासन लगातार महिलाओं की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों को सीमित करने वाले फरमान जारी कर रहा है। इसी कड़ी में अब तालिबान ने महिलाओं के व्यक्तिगत स्वास्थ्य और परिवार नियोजन से जुड़ी सुविधाओं पर भी कड़ा अंकुश लगा दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, तालिबान सरकार ने पूरे देश में गर्भनिरोधक दवाओं और गोलियों के इस्तेमाल व बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। प्रशासन ने इस संबंध में एक सख्त फरमान जारी किया है, जिसके तहत उन सभी क्लीनिकों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं जो महिलाओं को गर्भनिरोधक दवाएं उपलब्ध कराते थे।

इस नए आदेश के बाद अफगानिस्तान के स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। तालिबान के लड़ाके और अधिकारी अस्पतालों व क्लीनिकों की निगरानी कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी स्तर पर इन दवाओं का वितरण न हो। इतना ही नहीं, तालिबान ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी कड़ी चेतावनी दी है कि वे महिलाओं को गर्भनिरोधक गोलियां न दें और न ही गर्भपात (मिसकैरेज) से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में सहायता करें। यदि कोई डॉक्टर इस आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे गंभीर कानूनी परिणामों और सजा का सामना करना पड़ेगा।

तालिबान के इस फरमान का सबसे घातक असर अफगान महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ना शुरू हो गया है। दवाओं की किल्लत और वितरण पर रोक के कारण महिलाओं को परिवार नियोजन के सुरक्षित साधन नहीं मिल पा रहे हैं। पूरे देश में अब गर्भनिरोधक गोलियां मिलना लगभग असंभव हो गया है। डॉक्टरों ने भी प्रशासन के डर से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं और वे चाहकर भी महिलाओं की मदद नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिबंध के कारण आने वाले समय में अनचाहे गर्भ और प्रसव के दौरान होने वाली मौतों के आंकड़ों में बड़ी वृद्धि हो सकती है।

अफगानिस्तान में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है और तालिबान के नए नियमों ने स्थिति को और अधिक भयावह बना दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कम उम्र में विवाह और अंतराल के बिना लगातार बच्चे पैदा करने के कारण अफगानिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं कुपोषण का गंभीर शिकार हो गई हैं। उचित स्वास्थ्य देखभाल और पोषक तत्वों की कमी के कारण महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी), विटामिन की कमी और अनियंत्रित रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। गर्भनिरोधकों पर रोक के बाद यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है क्योंकि महिलाओं के शरीर को एक प्रसव के बाद दूसरे गर्भ के लिए तैयार होने का समय नहीं मिल पाएगा।

अफगानिस्तान में चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ा संकट महिला डॉक्टरों और नर्सों की भारी कमी के रूप में सामने आया है। अगस्त 2021 में जब से तालिबान की हुकूमत आई है, तब से महिलाओं की शिक्षा और रोजगार पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। 12 साल से अधिक उम्र की लड़कियों के स्कूल जाने पर रोक है, जिसका सीधा असर भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। महिला डॉक्टरों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को इलाज नहीं मिल पा रहा है। तालिबान के नियमों के अनुसार, महिला मरीज का इलाज केवल महिला डॉक्टर ही कर सकती है, लेकिन जब महिला डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। इसी कारण अब अफगानिस्तान में महिलाएं अपने घरों में ही बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर हैं, जहाँ आपातकालीन स्थिति में उनकी जान बचाने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं होता।

तालिबान ने केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि महिलाओं के सामाजिक जीवन को भी पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया है। सरकार द्वारा जारी पाबंदियों की सूची लंबी होती जा रही है। दुकानों के बाहर लगे बोर्डों पर महिलाओं की तस्वीरों को हटाने के आदेश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, कोई भी महिला किसी पुरुष रिश्तेदार (महरम) के बिना अकेले घर से बाहर नहीं निकल सकती। महिलाओं के वाहन चलाने पर रोक लगा दी गई है और उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए हिजाब पहनना और अपना चेहरा व शरीर पूरी तरह ढककर रखना अनिवार्य कर दिया गया है। यहाँ तक कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के बोलने या आवाज ऊंची करने पर भी बंदिशें लगा दी गई हैं।

अफगानिस्तान की यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। तालिबान के इन फैसलों ने महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से काटकर घर की चारदीवारी में कैद कर दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी स्वतंत्रता के अभाव में अफगान महिलाओं का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। गर्भनिरोधकों पर यह हालिया प्रतिबंध न केवल एक मानवीय संकट है, बल्कि यह महिलाओं के अपने शरीर पर उनके अधिकार को भी पूरी तरह से समाप्त करने की एक कोशिश है। यदि वैश्विक स्तर पर इन नीतियों का विरोध नहीं हुआ, तो आने वाले समय में अफगानिस्तान में एक पूरी पीढ़ी कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ सकती है। तालिबान के कट्टरपंथी नियमों ने एक ऐसे समाज का निर्माण कर दिया है जहाँ महिलाओं की पहचान केवल घर और बच्चों तक सीमित रह गई है, और उनके जीवन की सुरक्षा के लिए कोई ठोस तंत्र मौजूद नहीं है।

 

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