Afganistan: तालिबान के वरिष्ठ सदस्य नूर अहमद नूर संभालेंगे दिल्ली में अफगान दूतावास की कमान

नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के कूटनीतिक संबंधों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तालिबान शासन ने अपने वरिष्ठ सदस्य नूर अहमद नूर को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास का नया ‘चार्ज डी अफेयर्स’ (सीडीए) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की अक्टूबर में हुई सफल भारत यात्रा के बाद की गई है। नूर अहमद नूर उसी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो मुत्ताकी के साथ सात दिवसीय दौरे पर भारत आया था। इस नियुक्ति को दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और सुधरते रिश्तों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

नूर अहमद नूर की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो वे अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में प्रथम राजनीतिक प्रभाग के महानिदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें तालिबानी प्रशासन का एक अनुभवी सदस्य माना जाता है, जो विशेष रूप से दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञ हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब अफगानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण को लगभग पांच साल बीत चुके हैं। नूर अहमद नूर अब औपचारिक रूप से दिल्ली पहुंचकर दूतावास की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं।

भारत और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों में आई इस गर्माहट की नींव अक्टूबर 2024 में मुत्ताकी के दौरे के दौरान पड़ी थी। उस यात्रा के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमीर खान मुत्ताकी के बीच एक महत्वपूर्ण सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत भारत ने नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में ‘इस्लामिक अमीरात’ द्वारा नियुक्त राजनयिकों को स्वीकार करने पर रजामंदी दी थी। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि भारत ने अभी तक तालिबान शासन को आधिकारिक रूप से राजनयिक मान्यता प्रदान नहीं की है, लेकिन मानवीय और तकनीकी आधार पर सहयोग निरंतर बढ़ाया जा रहा है।

वर्तमान में नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास का कार्यभार सईद मोहम्मद इब्राहिम खिल संभाल रहे थे, जिन्हें अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती अशरफ गनी सरकार ने नियुक्त किया था। नूर अहमद नूर के आने से अब दूतावास का नेतृत्व सीधे वर्तमान अफगान प्रशासन के हाथ में चला जाएगा। गौरतलब है कि मुंबई और हैदराबाद में स्थित अफगानिस्तान के वाणिज्य दूतावास पहले से ही तालिबान द्वारा नियुक्त राजनयिकों के माध्यम से संचालित हो रहे हैं। दिल्ली दूतावास में इस बदलाव के साथ ही अब भारत में अफगानिस्तान के प्रमुख राजनयिक केंद्रों पर वर्तमान प्रशासन का नियंत्रण स्थापित हो जाएगा।

नूर अहमद नूर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहे हैं। पिछले वर्ष दिसंबर 2025 में उन्होंने बांग्लादेश का दौरा किया था, जहां उन्होंने कई प्रमुख इस्लामी नेताओं के साथ संवाद किया था। बांग्लादेश में हुए चुनावों से ठीक पहले की गई उनकी इस यात्रा को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से काफी अहम माना गया था और वहां के मीडिया में इसे व्यापक कवरेज मिली थी। अब भारत में उनकी नई भूमिका यह संकेत देती है कि अफगानिस्तान अपने पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के साथ राजनयिक संबंधों को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा है।

भारत के लिए अफगानिस्तान के साथ संबंधों को संतुलित रखना सामरिक दृष्टि से आवश्यक है। मुत्ताकी की यात्रा के बाद जिस तरह से दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को स्वीकार करने पर सहमति जताई, उससे व्यापार, मानवीय सहायता और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भविष्य में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है। नूर अहमद नूर की नियुक्ति इसी कड़ी का एक हिस्सा है, जिससे दिल्ली और काबुल के बीच संवाद के रास्ते और अधिक सुगम होंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नूर के नेतृत्व में अफगान दूतावास भारत के साथ मिलकर किन नए क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाता है।

 

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