Uttarakhand: अंकिता हत्याकांड में वीआईपी के चेहरे से हटेगा पर्दा और मुख्यमंत्री ने की सीबीआई जांच की संस्तुति

देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ का रहस्य सुलझाने के लिए अब कानूनी कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। पिछले दो सप्ताह से यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस प्रकरण में लंबे समय से यह आरोप लगाया जाता रहा है कि किसी रसूखदार व्यक्ति (वीआईपी) को ‘विशेष सेवा’ देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया था। अब इसी अज्ञात वीआईपी का नाम उजागर करने और इस पहलू की गहराई से जांच के लिए शुक्रवार को देहरादून के वसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस महानिदेशक को मिली एक गंभीर शिकायत के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का बड़ा फैसला लिया है।

इस पूरे घटनाक्रम में प्रमुख भूमिका प्रख्यात पर्यावरणविद और पद्मभूषण से सम्मानित अनिल प्रकाश जोशी की रही है। ‘हेस्को’ के संस्थापक और ‘माउंटेन मैन’ के नाम से पहचाने जाने वाले अनिल प्रकाश जोशी ने पुलिस महानिदेशक को एक औपचारिक शिकायत दी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में तर्क दिया कि हालांकि अंकिता हत्याकांड के मुख्य दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लगातार यह चर्चा हो रही है कि इस मामले में कुछ साक्ष्यों को जानबूझकर छिपाया या नष्ट किया गया है। जोशी ने जोर देकर कहा कि जिस अज्ञात वीआईपी का जिक्र बार-बार आ रहा है, उसकी भूमिका की जांच एक स्वतंत्र अपराध के रूप में की जानी चाहिए ताकि पूर्ण न्याय सुनिश्चित हो सके।

अनिल प्रकाश जोशी की शिकायत पर गंभीरता दिखाते हुए पुलिस महानिदेशक ने देहरादून के एसएसपी अजय सिंह को मामले की जांच सौंपी। इसके बाद एसएसपी के निर्देश पर वसंत विहार थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई पूरी की। पुलिस विभाग और गृह विभाग ने इस संवेदनशील मामले की पेचीदगियों को देखते हुए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का सुझाव दिया, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी संस्तुति प्रदान कर दी। सरकार का मानना है कि एक निष्पक्ष और केंद्रीय एजेंसी की जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।

इस मामले का घटनाक्रम काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अंकिता की हत्या सितंबर 2022 में हुई थी, जिसके बाद पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। दिसंबर 2022 में एसआईटी ने अपनी 500 पन्नों की रिपोर्ट अदालत में पेश की और 30 मई 2025 को निचली अदालत ने तीनों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, मामला तब फिर गर्माया जब दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें कथित तौर पर वीआईपी के नाम का उल्लेख था।

इसी कड़ी में, 7 जनवरी 2026 को अंकिता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई और मांग की कि मामले के इस अनछुए पहलू की जांच सीबीआई से कराई जाए। मुख्यमंत्री ने परिवार की भावनाओं और न्याय की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए 9 जनवरी 2026 को सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। अब इस जांच के जरिए उस वीआईपी के नाम पर लगा पर्दा हटने की उम्मीद है, जिसे लेकर प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। अंकिता को पूर्ण न्याय दिलाने की दिशा में इसे सरकार का एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

 

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