शिमला। हिमाचल प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समिट के दौरान हुए प्रदर्शन से जुड़े तीन प्रदर्शनकारियों की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के मामले ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। राज्य की खुफिया एजेंसी की भारी चूक को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा संज्ञान लिया है। वीरवार को मुख्यमंत्री ने राज्य सचिवालय में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक तिवारी से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब की। सरकार इस बात को लेकर गंभीर है कि बाहरी राज्य की पुलिस टीम प्रदेश की सीमाओं और कई जिलों से गुजरती हुई रोहड़ू तक कैसे पहुंच गई और राज्य के खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस की 13 सदस्यीय टीम, जिसका नेतृत्व आईपीएस अधिकारी राहुल विक्रम कर रहे थे, परवाणु के रास्ते हिमाचल में दाखिल हुई। यह टीम तड़के रोहड़ू स्थित एक निजी रिसॉर्ट में पहुंची और वहां से तीन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस को कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी। प्रदेश सरकार ने इस घटना को सूचना तंत्र की विफलता माना है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस बड़ी खुफिया चूक के पीछे हाल ही में सीआईडी विभाग में किए गए व्यापक फेरबदल को एक मुख्य कारण माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में विभाग के करीब सौ से अधिक अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह थानों और चौकियों से नया स्टाफ तैनात किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि अनुभवी कर्मियों की कमी और सूचना संकलन के कमजोर जमीनी नेटवर्क के कारण दिल्ली पुलिस की गतिविधियों का इनपुट समय रहते नहीं मिल सका। इससे पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग के समय भी खुफिया विभाग सटीक जानकारी जुटाने में नाकाम रहा था, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
इस संवेदनशील स्थिति के दौरान शिमला पुलिस की सक्रियता ने मामला और बिगड़ने से बचा लिया। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर मिली, शिमला पुलिस ने तुरंत शहर के बाहरी हिस्सों में चौकसी बढ़ा दी। आईएसबीटी शिमला, शोघी और धर्मपुर जैसे प्रमुख स्थानों पर नाकेबंदी कर विशेष जांच अभियान चलाया गया। पुलिस ने दिल्ली पुलिस की गाड़ियों को रोककर उन्हें वापस शिमला लाया, जिसके बाद दोनों राज्यों की पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर तीखी बहस हुई।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि शिमला पुलिस तत्परता नहीं दिखाती और दिल्ली की टीम त्यूणी मार्ग से होकर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर जाती, तो हिमाचल पुलिस के लिए कार्रवाई करना बेहद कठिन होता। फिलहाल, मुख्य सचिव संजय गुप्ता और डीजीपी अशोक तिवारी के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में सूचना नेटवर्क में समन्वय की कमी को दूर करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराज्यीय पुलिस कार्रवाई में निर्धारित नियमों और मर्यादाओं का पालन अनिवार्य होना चाहिए।