नई दिल्ली। पाकिस्तान की जमीन एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के आपसी गठजोड़ का केंद्र बनती नजर आ रही है। हाल ही में सामने आए एक नए वीडियो ने दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। इस वीडियो से यह खुलासा हुआ है कि हमास के वरिष्ठ कमांडर नजी जहीर और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख कमांडर राशिद अली संधू ने पाकिस्तान के गुजरांवाला शहर में एक गुप्त बैठक की है। यह मुलाकात न केवल इन दोनों संगठनों के बीच बढ़ती नजदीकियों को दर्शाती है, बल्कि पाकिस्तान में वैश्विक आतंकी गुटों की निर्बाध आवाजाही पर भी मुहर लगाती है।
यह पूरी घटना पाकिस्तान मार्कजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान घटित हुई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमएमएल वास्तव में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक राजनीतिक मुखौटा है, जिसका उपयोग वह अपनी गतिविधियों को वैधता देने के लिए करता है। गुजरांवाला के इस कार्यक्रम में नजी जहीर को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था, जबकि राशिद अली संधू वहां पीएमएमएल के एक प्रमुख नेता के रूप में उपस्थित था। एक ही मंच पर हमास और लश्कर के इन दो बड़े चेहरों का साथ दिखना एक नए और खतरनाक सुरक्षा समीकरण की ओर इशारा करता है।
नजी जहीर का पाकिस्तान और उसके आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव काफी गहरा है। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 में उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) का दौरा किया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि जहीर का यह दौरा पहलगाम में हुए आतंकी हमले से ठीक कुछ हफ्ते पहले हुआ था। पीओके में अपनी यात्रा के दौरान उसने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष कमांडरों के साथ एक साझा बैठक की और बाद में एक भारत विरोधी रैली को भी संबोधित किया। इस रैली में उसने खुले तौर पर आतंकी गुटों के साथ मिलकर काम करने की रणनीति पर चर्चा की थी।
जहीर की पाकिस्तान में सक्रियता का सिलसिला पिछले काफी समय से चल रहा है। जनवरी 2024 में उसे कराची में देखा गया था, जहां उसने कराची प्रेस क्लब में स्थानीय मीडिया कर्मियों के साथ संवाद किया। इसके कुछ समय बाद, अप्रैल 2024 में वह इस्लामाबाद पहुंचा, जहां उसे इस्लामाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया। देश की राजधानी में एक कानूनी संस्था द्वारा हमास के कमांडर का सम्मान करना यह स्पष्ट करता है कि उसे पाकिस्तान के विभिन्न वर्गों से व्यापक समर्थन प्राप्त है।
7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमलों के बाद जहीर की गतिविधियां और तेज हो गईं। हमलों के मात्र एक सप्ताह बाद, 14 अक्टूबर को वह पाकिस्तान पहुंचा और देश की प्रमुख इस्लामिस्ट पार्टी जमीअत उलेमा-ए-इस्लाम के नेता फजल-उर-रहमान से मुलाकात की। उसी दिन उसने पेशावर में आयोजित मुफ्ती महमूद सम्मेलन में शिरकत की, जिसमें हमास का एक अन्य बड़ा नेता खालिद मशाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ा था।
इसके बाद जहीर की मौजूदगी पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी दर्ज की गई। 29 अक्टूबर 2023 को उसने बलूचिस्तान के क्वेटा में ‘अल-अक्सा स्टॉर्म’ सम्मेलन में भाग लिया और नवंबर 2023 में उसे कराची के ‘तूफान-ए-अक्सा’ कार्यक्रम में देखा गया। इन सभी घटनाओं से यह साफ़ है कि हमास के नेता पाकिस्तान में पूरी आजादी के साथ घूम रहे हैं और वहां के स्थानीय आतंकी नेटवर्क के साथ मिलकर एक बड़ा और साझा मोर्चा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान का इस तरह आतंकी संगठनों की मिलनस्थली बनना आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।