नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों बांग्लादेश की यात्रा पर हैं जहां एक शिष्टाचार भेंट ने पाकिस्तान की हताशा को जगजाहिर कर दिया है। ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से हाथ मिलाया जो एक सामान्य कूटनीतिक शिष्टाचार था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर से मिले गहरे जख्मों से परेशान पाकिस्तान ने इस छोटी सी घटना को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की है।
समाचार एजेंसी एएनआई ने डॉन अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान ने दावा किया है कि यह हाथ मिलाना तब हुआ जब विदेश मंत्री एस जयशंकर खुद चलकर अयाज सादिक के पास गए। पाकिस्तान की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में अपनी हताशा छिपाते हुए दावा किया गया कि पहलगाम हमले के बाद से पाकिस्तान लगातार बातचीत, संयम और सहयोग की बात कर रहा है। उसने शांति वार्ता और संयुक्त जांच का राग अलापा है और कहा है कि उसका मकसद बिना उकसावे वाली आक्रामकता और तनाव को रोकना है।
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास आ गई थी। इस हमले के बाद भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कड़े राजनयिक और रणनीतिक कदम उठाए थे। भारत ने साफ कर दिया था कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते। इसी नीति के तहत भारत ने राजनयिक जुड़ाव को कम कर दिया था और ऐतिहासिक सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी को भी निलंबित कर दिया था जो भारत की गंभीरता को दर्शाता है।
भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाते हुए सीमा पार आवाजाही और अन्य द्विपक्षीय संबंधों पर भी रोक लगा दी थी। भारत का स्पष्ट कहना है कि किसी भी तरह की बातचीत के लिए पहले पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी होगी और हमलों के लिए जवाबदेही तय करनी होगी। इसके अलावा भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा के आतंकी कैंपों पर सटीक हमले किए थे और पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बनाकर उनकी नापाक हरकतों का करारा जवाब दिया था। ऐसे में जयशंकर की यह मुलाकात महज एक शिष्टाचार थी जिसे पाकिस्तान भुनाने की कोशिश कर रहा है।