शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में कार्यरत हजारों मल्टी टास्क वर्कर्स के लिए एक बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान विधायक आरएस बाली द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि राज्य सरकार जल्द ही इन कर्मचारियों के लिए एक समान नीति तैयार करने जा रही है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों में तैनात वर्करों की सेवा शर्तों और उनके मानदेय में व्याप्त विसंगतियों को दूर करना है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन को अवगत कराया कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विभागों में तैनात मल्टी टास्क वर्कर्स के लिए कोई एक निश्चित नीति उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि अभी अलग-अलग निगमों, बोर्डों और विभागों में इन कर्मचारियों से अलग-अलग तरीके से काम लिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, कुछ विभागों में मल्टी टास्क वर्कर केवल चार घंटे की ड्यूटी दे रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर उनसे छह घंटे काम लिया जा रहा है। इतना ही नहीं, उनकी सेवा शर्तें भी एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न हैं और उन्हें मिलने वाले मानदेय में भी काफी अंतर है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे पर अत्यंत गंभीर है और एक ऐसी व्यापक नीति पर कार्य कर रही है जो इन सभी वर्करों के मानदेय और कार्यप्रणाली में एकरूपता सुनिश्चित करेगी।
इसी चर्चा के दौरान उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विभागों में भरे गए पदों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि अकेले जल शक्ति विभाग में ही अब तक 4,100 मल्टी टास्क वर्कर्स के पद भरे जा चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में 866 पद, 2021-22 में 1,397 पद, 2022-23 में 373 पद और वर्ष 2023-24 में 1,464 पद भरे गए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्तमान सरकार ने इन वर्करों के हितों का ध्यान रखते हुए उनके मानदेय को 6,600 रुपये से बढ़ाकर 7,100 रुपये कर दिया है।
विधायक आरएस बाली ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मल्टी टास्क वर्कर जमीनी स्तर पर बेहद कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान नियमों के अनुसार, इन कर्मचारियों को आठ साल की सेवा के बाद ‘जॉब ट्रेनी’ बनाया जाता है और उसके बाद ही वे अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर आने के पात्र होते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुबंध पर आने के लिए वर्तमान में केवल 15 प्रतिशत कोटा निर्धारित है, जो कि बहुत कम है। बाली ने सरकार से इस कोटे को बढ़ाने की पुरजोर मांग की ताकि अधिक से अधिक कर्मचारियों को सुरक्षित भविष्य मिल सके।
हिमाचल प्रदेश में इस समय कुल मिलाकर लगभग 12,000 मल्टी टास्क वर्कर विभिन्न सेवाओं में अपना योगदान दे रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और जल शक्ति विभाग में है। इसके अलावा कई अन्य बोर्डों और निगमों में भी इनकी बड़े पैमाने पर तैनाती की गई है। सरकार ने इन कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और नीति निर्धारण के लिए उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पहले ही एक उच्च स्तरीय कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया हुआ है।
मुख्यमंत्री के इस एलान के बाद प्रदेश के हजारों मल्टी टास्क वर्कर्स में उम्मीद की नई किरण जगी है। एक समान नीति लागू होने से न केवल उनके काम के घंटों में स्पष्टता आएगी, बल्कि पूरे प्रदेश में एक जैसा मानदेय मिलने से आर्थिक भेदभाव भी समाप्त होगा। सरकार का लक्ष्य है कि पारदर्शी नीति के माध्यम से इन कर्मचारियों के कार्य की महत्ता को पहचान दी जाए और उन्हें एक सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि नीति निर्माण की प्रक्रिया को जल्द ही अंतिम रूप देकर इसे लागू कर दिया जाएगा।
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