खटीमा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को खटीमा में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के उन वीर शहीदों को याद किया, जिन्होंने पृथक राज्य की मांग के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। शहीद स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खटीमा गोलीकांड के बलिदानियों की प्रतिमाओं पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस भावुक अवसर पर उन्होंने शहीद परिवारों के सदस्यों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन खटीमा गोलीकांड के उन सात अमर नायकों भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानन्द भट्ट और परमजीत सिंह के महान बलिदान को याद करने का है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का हर नागरिक इन वीरों के संघर्ष का ऋणी रहेगा। धामी ने खटीमा की धरती को राज्य आंदोलन की ‘जननी’ और ‘तपोभूमि’ करार देते हुए कहा कि खटीमा गोलीकांड ने ही अलग राज्य की मांग को एक नई और निर्णायक दिशा प्रदान की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसी घटनाएं राज्य के इतिहास के वे पन्ने हैं, जिन्हें आंदोलनकारियों ने अपने रक्त से लिखा है। यह राज्य किसी उपहार के रूप में नहीं मिला, बल्कि इसके पीछे हजारों लोगों का त्याग और बलिदान छिपा है।
मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ‘उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के चिन्हित आन्दोलनकारियों या उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण अधिनियम, 2023’ लागू किया है, जिसके तहत उन्हें सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। पेंशन के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि शहीद परिवारों की मासिक पेंशन को 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये कर दिया गया है। वहीं, आंदोलन के दौरान जेल जाने वाले या घायल होने वाले व्यक्तियों को 7 हजार रुपये और सक्रिय आंदोलनकारियों को 5500 रुपये प्रति माह पेंशन दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, सभी चिन्हित आंदोलनकारियों के लिए सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है।
राज्य निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मातृशक्ति के बिना यह आंदोलन सफल नहीं हो पाता। इसी योगदान के सम्मान में प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री ने सरकार के अन्य ऐतिहासिक निर्णयों की चर्चा करते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जहां समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की गई है। युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून बनाया गया है और पारदर्शी तरीके से पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी रोजगार दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगारोधी कानून प्रभावी हैं। साथ ही, अतिक्रमण के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को मुक्त कराया गया है। कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी और नानकमत्ता विधायक गोपाल सिंह राणा ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक शिव अरोरा, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, राज्य आंदोलनकारी और स्थानीय निवासी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अंत में पुनः आह्वान किया कि शहीदों के सपनों के अनुरूप एक विकसित और समृद्ध उत्तराखंड बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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