लालड़ू।
पंजाब के मोहाली जिले के अंतर्गत आने वाले लालड़ू में मंगलवार को किसानों का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। खेती की मोटरों के लिए पर्याप्त बिजली न मिलने से नाराज किसानों ने अंबाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह ठप्प कर दिया। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेतृत्व में किए गए इस विरोध प्रदर्शन के कारण करीब डेढ़ घंटे तक यातायात बाधित रहा, जिससे पंजाब और हरियाणा ही नहीं बल्कि चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जाने वाले हजारों वाहन चालक भीषण जाम में फंसे रहे।
किसानों का यह विरोध प्रदर्शन सुबह लालड़ू स्थित पावरकॉम के एक्सईएन कार्यालय के बाहर शुरू हुआ था। संगठन के जिला प्रधान लखविंदर सिंह हैप्पी मलकपुर की अगुवाई में बड़ी संख्या में किसान वहां एकत्रित हुए और अपनी समस्याओं को लेकर विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। किसानों का मुख्य आरोप था कि राज्य सरकार और बिजली विभाग दावों के बावजूद उन्हें खेती के लिए आवश्यक न्यूनतम बिजली भी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। किसानों ने कहा कि फसलों की सिंचाई के लिए इस समय निर्बाध बिजली की सख्त जरूरत है, लेकिन अघोषित बिजली कटौती के कारण फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।
धरने के दौरान किसान नेताओं ने पावरकॉम के अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा, लेकिन शुरुआत में अधिकारियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे किसानों का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने कार्यालय से निकलकर सीधे अंबाला-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे का रुख किया। किसानों ने सड़क के बीचों-बीच बैठकर चक्का जाम कर दिया। सुबह 11 बजे शुरू हुए इस जाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। छोटे वाहनों से लेकर भारी ट्रक और बसें इस जाम में फंस गईं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हाईवे पर जाम लगने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और पावरकॉम के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने किसानों को समझाने और सड़क से हटाने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे। किसान नेताओं का कहना था कि वे केवल मौखिक आश्वासन पर अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे, क्योंकि विभाग पहले भी कई बार वादे करके मुकर चुका है। स्थिति को तनावपूर्ण होते देख अधिकारियों ने किसान नेताओं के साथ मौके पर ही एक आपात बैठक की।
काफी देर तक चली इस वार्ता के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने किसानों की मांग को स्वीकार करते हुए एक लिखित समझौता किया। पावरकॉम अधिकारियों ने किसानों को लिखित में यह आश्वासन दिया कि भविष्य में खेती की मोटरों के लिए प्रतिदिन 20 घंटे निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस लिखित दस्तावेज के मिलने के बाद ही किसान शांत हुए। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे हाईवे से जाम हटाया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सुचारू हो सका। लखविंदर सिंह हैप्पी मलकपुर ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने लिखित आश्वासन के बावजूद बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं किया, तो किसान और भी बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। फिलहाल लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी है।