शिमला। हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार ने अपनी विभिन्न वित्तीय आवश्यकताओं और विकास योजनाओं को गति देने के लिए बाजार से 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेने का निर्णय लिया है। प्रदेश की सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ते खर्चों के बीच सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग द्वारा इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस ऋण का मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रहे विकास कार्यों को बिना किसी रुकावट के पूरा करना और कर्मचारियों के वेतन व पेंशन जैसे अनिवार्य दायित्वों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।
दो श्रेणियों के बांड के माध्यम से जुटाया जाएगा फंड
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार, हिमाचल प्रदेश स्टेट डेवलपमेंट लोन (एसजीएस) के तहत दो अलग-अलग बांड दोबारा जारी किए जाएंगे। इनमें पहला बांड 400 करोड़ रुपये का है, जिस पर 7.78 प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज देय होगा; इसकी परिपक्वता अवधि वर्ष 2044 तक निर्धारित की गई है। वहीं, दूसरा बांड 300 करोड़ रुपये का है, जिस पर 7.77 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाएगा; यह बांड वर्ष 2049 में परिपक्व होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये बांड लंबी अवधि के निवेश के लिए निवेशकों के सामने रखे जाएंगे।
आरबीआई के माध्यम से होगी ई-नीलामी
इस ऋण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सहायता ली जा रही है। अधिसूचना के मुताबिक, दोनों श्रेणियों के ऋणों की ई-नीलामी 4 अगस्त को आरबीआई मुंबई के माध्यम से आयोजित की जाएगी। नीलामी में सफल रहने वाले बोलीदाताओं को 5 अगस्त तक ऋण राशि का भुगतान करना होगा। सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि कुल निर्गम राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा गैर-प्रतिस्पर्धी बोलीदाताओं के लिए आरक्षित रखा जा सकता है, जिससे छोटे निवेशकों को भी इसमें भागीदारी का अवसर मिल सके।
राज्य पर बढ़ता कर्ज का बोझ और वित्तीय स्थिति
इस 700 करोड़ रुपये के नए ऋण के साथ, वर्तमान वित्त वर्ष में हिमाचल सरकार द्वारा लिया गया कुल उधार 3,500 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुँच जाएगा। प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो कर्ज लेने और निर्धारित किस्तों की अदायगी के बाद राज्य पर कुल देनदारी अब लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह बढ़ता हुआ कर्ज का ग्राफ प्रदेश की आर्थिकी के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, हालांकि सरकार का तर्क है कि विकास की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह ऋण लेना आवश्यक है।
ब्याज भुगतान की शर्तें और समय सीमा
ऋण की शर्तों के अनुसार, सरकार इन बांडों पर मिलने वाले ब्याज का भुगतान साल में दो बार करेगी। ब्याज का अर्द्धवार्षिक भुगतान प्रत्येक वर्ष 24 जून और 24 दिसंबर को किया जाएगा। 400 करोड़ रुपये का बांड 18 साल की अवधि के लिए होगा, जबकि 300 करोड़ रुपये का बांड 23 साल की लंबी अवधि के लिए है। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन और पेंशन जैसे खर्चों के लिए कर्ज पर निर्भरता सरकार की वित्तीय सीमाओं को दर्शाती है, लेकिन सार्वजनिक कल्याण के कार्यों के लिए यह एक अनिवार्य प्रक्रिया बन गई है।
Pls read:Himachal: हिमाचल प्रदेश में कुदरत का कहर बारिश और भूस्खलन की चपेट में आने से 85 लोगों ने गंवाई जान