चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल के शनिवार को होने वाले पंजाब दौरे के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इंटरनेट मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट साझा की है, जिसने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। तिवारी ने मशहूर उर्दू शायर हबीब जालिब की एक चर्चित कविता की दो पंक्तियां साझा की हैं, जिन्हें सीधे तौर पर सत्ता और संगठन के भीतर चल रही कार्यप्रणाली पर एक कड़ा कटाक्ष माना जा रहा है।
सत्ता और चापलूसी पर हबीब जालिब का कटाक्ष
मनीष तिवारी द्वारा साझा की गई पंक्तियों का भावार्थ यह है कि यदि कोई व्यक्ति सत्ता या किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व के सामने अपना सिर झुका देता है और उसकी खुशामद में लग जाता है, तो व्यवस्था उसे बहुत बड़ा, सफल और प्रतिष्ठित बना देती है। हबीब जालिब अपनी क्रांतिकारी और बेबाक शायरी के लिए जाने जाते थे, जिन्होंने हमेशा चाटुकारिता और अवसरवाद की राजनीति पर प्रहार किया। तिवारी द्वारा इन पंक्तियों का चयन करना इस बात का संकेत है कि वे संगठन के भीतर सिद्धांतों और योग्यता के बजाय ‘जी-हुजूरी’ को मिल रही अहमियत से आहत हैं।
संगठनात्मक फेरबदल और तिवारी की अनदेखी
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मनीष तिवारी की इस नाराजगी के पीछे हाल ही में हुआ पंजाब कांग्रेस का संगठनात्मक बदलाव है। दरअसल, पिछले दिनों जब पंजाब कांग्रेस की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया गया, तो उसमें मनीष तिवारी को कोई स्थान नहीं दिया गया। पार्टी के इस निर्णय के बाद से ही तिवारी के समर्थकों में असंतोष देखा जा रहा था। हालांकि तिवारी ने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन जिस समय भूपेश बघेल राज्य के नेताओं के साथ रणनीति बना रहे हैं, उसी समय ऐसी पोस्ट आना संगठन के भीतर की गुटबाजी को उजागर करती है।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें
मनीष तिवारी के इस रुख को पिछले महीने के एक अन्य घटनाक्रम से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले महीने जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, तब उन्होंने सार्वजनिक मंच पर मनीष तिवारी को विशेष तवज्जो दी थी। प्रधानमंत्री द्वारा एक विपक्षी सांसद को इस तरह महत्व दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब अपनी ही पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ इशारों में हमला करने के बाद उन अटकलों को और बल मिल रहा है कि क्या तिवारी कांग्रेस के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
भूपेश बघेल के दौरे और अंदरूनी कलह की चुनौती
भूपेश बघेल का यह पंजाब दौरा आगामी चुनाव और संगठन को मजबूत करने की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में मनीष तिवारी जैसी वरिष्ठ शख्सियत का इस तरह का रुख पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है। तिवारी पहले भी कई बार इंटरनेट मीडिया के माध्यम से पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। पंजाब कांग्रेस में पहले से ही कई गुट सक्रिय हैं और अब तिवारी की इस नई टिप्पणी ने प्रभारी बघेल के सामने समन्वय स्थापित करने की एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
अनुशासन और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर चर्चा
कांग्रेस पार्टी के भीतर मनीष तिवारी की इस पोस्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कार्यकर्ता और स्थानीय नेता इसे ‘अनुशासनहीनता’ और ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के चश्मे से देख रहे हैं। तिवारी का तर्क रहा है कि राजनीति में केवल वफादारी नहीं, बल्कि अनुभव और विचारधारा का भी सम्मान होना चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस आलाकमान तिवारी की इस नाराजगी को दूर करने के लिए कोई कदम उठाता है या फिर यह दूरियां और अधिक बढ़ती चली जाती हैं। फिलहाल, जालिब की शायरी ने पंजाब की ठंडी सियासत में गर्मी बढ़ा दी है।