शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की भारी बारिश और उसके बाद होने वाले भूस्खलन ने पूरे प्रदेश में तबाही मचा रखी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस मानसूनी सीजन में अब तक 85 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले मंगलवार को चंबा जिले में भारी बारिश के कारण हुए एक सड़क हादसे में 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद मृतकों का कुल आंकड़ा 80 से बढ़कर 85 तक पहुँच गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश की 130 से अधिक मुख्य और संपर्क सड़कें वर्तमान में यातायात के लिए पूरी तरह बंद हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बंद सड़कें और गांवों का संपर्क भंग
भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण प्रदेश के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, 130 सड़कें अभी भी बाधित हैं, जिन्हें बहाल करने के लिए विभाग की टीमें और भारी मशीनरी युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। सड़कों के बंद होने से दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है, जिससे वहां जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा आ रही है। प्रशासन लगातार कोशिश कर रहा है कि संवेदनशील रास्तों को जल्द से जल्द खोला जा सके, लेकिन लगातार गिरता मलबा इन कार्यों में बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मौसम विभाग की चेतावनी और बाढ़ का खतरा
हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिन और भी भारी हो सकते हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश में 5 अगस्त तक मूसलाधार वर्षा का दौर जारी रहने की आशंका जताई है। विशेष रूप से 31 जुलाई की सुबह तक कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन के निचले इलाकों व जलग्रहण क्षेत्रों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने का हाई अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन क्षेत्रों में नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जो आसपास की बस्तियों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इन जिलों के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी
आगामी दिनों के लिए मौसम विभाग ने श्रेणीवार चेतावनी जारी की है। 31 जुलाई को बिलासपुर, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ घोषित किया गया है, जिसका अर्थ है कि यहां अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद, 1 अगस्त को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सोलन में ‘यलो अलर्ट’ रहेगा। इसी तरह 2 अगस्त को चंबा, कांगड़ा, शिमला और सिरमौर के लिए चेतावनी दी गई है। 3 अगस्त को भी चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने इन सभी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने को कहा है।
सोलन में धंसी जमीन और मकानों को नुकसान
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से संपत्ति के नुकसान की खबरें भी सामने आ रही हैं। सोलन जिले के दाड़लाघाट की दावटी पंचायत के अंतर्गत आने वाले फांजी गांव में जमीन धंसने की एक बड़ी घटना हुई है। लगातार हो रही बारिश के कारण एक निर्माणाधीन मकान के पीछे की जमीन अचानक बैठ गई, जिससे लगभग 50 फीट लंबा सुरक्षा घेरा (डंगा) ढह गया। इस हादसे की वजह से घर के चार कमरों को भी गंभीर क्षति पहुँची है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
बारिश के आंकड़ों में चंबा ने तोड़े रिकॉर्ड
23 से 30 जुलाई के बीच प्रदेश के मौसम में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। इस एक सप्ताह की अवधि में हिमाचल में औसतन 69.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश (63.4 मिमी) से लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। जिलों के आधार पर विश्लेषण करें तो चंबा जिला इस बार मानसून की सबसे ज्यादा मार झेल रहा है। चंबा में सामान्य तौर पर इस अवधि में 73.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल वहां 149.8 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह सामान्य से 103 प्रतिशत अधिक है, जो वहां आई तबाही का मुख्य कारण माना जा रहा है।
प्रशासन की एडवाइजरी और सुरक्षा के निर्देश
बिगड़ते मौसम और नदियों के उफान को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम जनता के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। लोगों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी स्थिति में नदी-नालों के समीप न जाएं और भूस्खलन वाले क्षेत्रों की ओर यात्रा करने से बचें। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को मौसम विभाग द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन और अपडेट्स पर नजर रखने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने भी सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की निरंतर निगरानी करें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।