Himachal: हिमाचल प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होगी प्रदेश की गौरवगाथा छठी से आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों में होगा व्यापक बदलाव

शिमला। हिमाचल प्रदेश की युवा पीढ़ी को अपने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से रूबरू कराने के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने छठी से आठवीं कक्षा तक की पाठ्यपुस्तकों के संशोधन और सुदृढ़ीकरण को लेकर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश के भूगोल, समाज, इतिहास, लोक संस्कृति, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े प्रमुख पहलुओं को स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल करने पर विस्तृत चर्चा हुई।


प्रागैतिहासिक काल से वर्तमान तक का सफर पढ़ेंगे छात्र
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि संशोधित पाठ्यपुस्तकों में हिमाचल प्रदेश की प्रागैतिहासिक काल से लेकर पूर्ण राज्य बनने तक की विकास यात्रा को रोचक और जानकारीपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। पाठ्यक्रम में न केवल राज्य के गठन का इतिहास होगा, बल्कि हिमाचल की विभिन्न बोलियों, पारंपरिक व्यंजनों और लोक कलाओं को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ अपने परिवेश और सामाजिक मूल्यों की गहरी समझ विकसित करने में मदद करना है।


वीर जवानों और स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएं होंगी शामिल
देवभूमि के वीरों के बलिदान को सम्मान देने के लिए नए पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों, कारगिल नायकों और शौर्य पदक विजेताओं की जीवनियों को जोड़ा जाएगा। रोहित ठाकुर के अनुसार, बच्चों को प्रदेश के सैनिकों के साहस के बारे में बताना उनमें राष्ट्रभक्ति और गौरव की भावना पैदा करेगा। इसके अतिरिक्त, पाठ्यपुस्तकों में राज्य की वर्तमान चुनौतियों, आर्थिक विकास की संभावनाओं और प्रशासनिक ढांचे के बारे में भी प्रमाणित तथ्य शामिल किए जाएंगे, जिससे छात्र हिमाचल की पहचान और उसकी विशेषताओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।


शैक्षणिक सत्र 2027-28 से लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार ने इस परियोजना के लिए एक सख्त समय सीमा निर्धारित की है। शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि पाठ्यपुस्तकों के लिए आवश्यक सामग्री और तथ्यों को एक महीने के भीतर अंतिम रूप दिया जाए ताकि समय पर प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू हो सके। इन संशोधित पुस्तकों को शैक्षणिक सत्र 2027-28 से राज्य के सभी स्कूलों में विधिवत रूप से पेश किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह बदलाव न केवल छात्रों की विश्लेषणात्मक सोच को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।


पाठ्यक्रम समीक्षा के लिए गठित हुई उच्चस्तरीय समिति
रोहित ठाकुर ने जानकारी दी कि उनकी अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम की निरंतर समीक्षा कर रही है। यह समिति पाठ्यक्रम को आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए समय-समय पर बैठकें आयोजित करेगी। इस समिति में शिक्षा विभाग के सचिव, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के प्रतिनिधि, राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सदस्य और सहायक प्रोफेसरों सहित कई शिक्षाविदों को शामिल किया गया है, ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।


बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामय उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंकुश शर्मा ने हिस्सा लिया। इसके अलावा उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह, एससीईआरटी की प्रधानाचार्य डॉ. रितु शर्मा सोनी और कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने एकमत होकर स्वीकार किया कि स्थानीय तथ्यों को शिक्षा का हिस्सा बनाना छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। सरकार की इस पहल को प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

 

Pls read:Himachal: हिमाचल प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव 2026 की विस्तृत रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी गई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *