US: अमेरिकी सदन में यूक्रेन की सहायता और रूस पर नए प्रतिबंध पारित – The Hill News

US: अमेरिकी सदन में यूक्रेन की सहायता और रूस पर नए प्रतिबंध पारित

नई दिल्ली। अमेरिकी संसद के निचले सदन ने वैश्विक राजनीति और कूटनीति के लिहाज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यूक्रेन की सैन्य सहायता बढ़ाने और रूस पर नए कड़े प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के पारित होने से न केवल पूर्वी यूरोप में चल रहे संघर्ष के समीकरण बदल सकते हैं, बल्कि यह वाइट हाउस और अमेरिकी संसद के बीच विदेश नीति को लेकर बढ़ते मतभेदों को भी उजागर करता है। रिपब्लिकन नेताओं की ओर से जताई गई तमाम आपत्तियों और विरोध के बावजूद, सदन में इस प्रस्ताव को बहुमत से पारित कर दिया गया।

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना और वहां युद्ध के कारण हुए विनाश के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में गति लाना है। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स द्वारा प्रायोजित इस विधेयक के माध्यम से यूक्रेन को एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की सीधी सुरक्षा और पुनर्निर्माण सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, विधेयक में एक बड़ा वित्तीय तंत्र भी शामिल किया गया है, जिसके तहत ऋण (लोन) के माध्यम से यूक्रेन की रक्षा जरूरतों के लिए आठ अरब अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम राशि उपलब्ध कराई जाएगी। यह वित्तीय मदद यूक्रेन को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और रूस के खिलाफ अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी।

सदन में इस विधेयक पर हुई वोटिंग के दौरान कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां अंततः यह 226-195 के मतों के अंतर से पारित हुआ। इस मतदान प्रक्रिया ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी नीति निर्माता यूक्रेन के मुद्दे पर बंटे हुए हैं, लेकिन बहुमत अभी भी सहायता जारी रखने के पक्ष में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध संबंधी दृष्टिकोण के प्रति सदन के असंतोष को दर्शाता है। रिपब्लिकन खेमे के कई नेता यूक्रेन को दी जाने वाली भारी वित्तीय मदद का विरोध कर रहे थे, लेकिन डेमोक्रेट्स ने इसे वैश्विक लोकतंत्र और सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताते हुए पारित करवा लिया।

यह घटनाक्रम अमेरिकी विदेश नीति में एक सप्ताह के भीतर दूसरा ऐसा मौका है, जब सदन और राष्ट्रपति के बीच स्पष्ट मतभेद खुलकर सामने आए हैं। इससे ठीक एक दिन पहले ही सदन ने ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकने के उद्देश्य से युद्ध शक्तियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इन दोनों फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिकी संसद अब विदेश नीति और सैन्य हस्तक्षेप के मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की ओर बढ़ रही है और राष्ट्रपति की शक्तियों पर विधायी अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है।

रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों का उद्देश्य उसकी आर्थिक घेराबंदी को और कड़ा करना है। इन प्रतिबंधों के माध्यम से रूसी अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है जो युद्ध के लिए वित्त पोषण करते हैं। दूसरी ओर, यूक्रेन के लिए प्रस्तावित सहायता राशि का एक बड़ा हिस्सा बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और सुरक्षा उपकरणों की खरीद पर खर्च किया जाएगा। सदन के इस फैसले के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और वैश्विक स्तर पर रूस और अमेरिका के संबंध किस दिशा में मुड़ते हैं। फिलहाल, यह विधेयक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में वाशिंगटन के कड़े रुख का संकेत दे रहा है।

 

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