नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार को हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सामने एक बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष में अमेरिका ने जीत हासिल कर ली है। रूबियो के अनुसार, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब समाप्त हो चुका है और ईरान की सैन्य क्षमता को व्यापक स्तर पर ध्वस्त कर दिया गया है। हालांकि, उनके इस दावे के बीच भी क्षेत्र में लगातार घातक हमले हो रहे हैं, जो जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करते हैं।
मार्को रूबियो ने अमेरिकी संसद की समिति को जानकारी देते हुए बताया कि अब ईरान के भीतर उनकी सेना को कमजोर करने के लिए निरंतर हमलों की जरूरत नहीं रह गई है। उन्होंने ‘जीत’ को परिभाषित करते हुए कहा कि अमेरिकी और इजरायली सेना ने मिलकर ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। रूबियो के मुताबिक, ईरान के पास मौजूद मिसाइल लॉन्चरों की संख्या अब बहुत कम रह गई है और उनके ड्रोन का जखीरा भी काफी हद तक खत्म हो गया है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि ईरान की बची-खुची वायुसेना और पूरी पारंपरिक नौसेना का भी सफाया किया जा चुका है।
28 फरवरी को शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने पूरे मध्य-पूर्व को अपनी चपेट में ले रखा है। रूबियो के दावों के उलट, ईरान ने क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों को निशाना बनाना जारी रखा है और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी ढंग से बाधित कर रखा है। इसी कारण रूबियो को सदन में डेमोक्रेट्स के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध करने वाले सांसदों का मानना है कि संघर्ष अभी थमा नहीं है और अमेरिकी सेना के लिए खतरा बरकरार है।
कैलिफोर्निया की प्रतिनिधि सारा जैकब्स ने रूबियो के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि केवल ऑपरेशन का नाम बदल देने से हकीकत नहीं बदल जाती। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है और वहां तैनात अमेरिकी सैनिक लगातार खतरे के साए में हैं। रूबियो के बयान वाले दिन ही ईरान की ओर से कुवैत के हवाई अड्डे पर भीषण हमला किया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 63 लोग घायल हुए। इसके साथ ही बहरीन में भी, जहां अमेरिकी सेना की बड़ी उपस्थिति है, रात के समय ईरानी ड्रोन द्वारा हमले किए गए।
ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता के संबंध में रूबियो ने बताया कि फिलहाल बातचीत का मुख्य केंद्र ईरान का अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार है। उन्होंने सांसदों को स्पष्ट किया कि तेहरान ने अभी तक किसी भी औपचारिक शांति समझौते पर अपनी सहमति नहीं दी है। रूबियो ने स्वीकार किया कि हालांकि कुछ दस्तावेजों और प्रस्तावों का आदान-प्रदान जरूर हुआ है, लेकिन बुधवार सुबह तक ईरानी नेतृत्व की ओर से किसी भी अंतिम मंजूरी की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में ‘जीत’ के दावों और जारी हमलों के बीच मध्य-पूर्व में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
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