जोगेंद्रनगर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में डाक विभाग की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। चौंतड़ा डाकघर के अंतर्गत आने वाले गोलवां और जलपेहड़ क्षेत्र में तैनात दो ग्रामीण डाक सेवक महीनों तक जनता की चिट्ठियां बांटने के बजाय उन्हें अपने कमरे में छिपाकर रखते रहे। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब इन डाक सेवकों के किराये के कमरे में हो रहे हुड़दंग की शिकायत पर पुलिस वहां पहुंची। पुलिस को कमरे की तलाशी के दौरान भारी मात्रा में सरकारी और निजी डाक बरामद हुई है, जो पिछले चार महीनों से वहीं धूल फांक रही थी।
डाक विभाग ने इस घोर लापरवाही का संज्ञान लेते हुए दोनों डाक सेवकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरोपितों की पहचान मयंक और दीपक के रूप में हुई है, जो मूल रूप से हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले हैं। विभाग ने इनके विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। जांच पूरी होने तक इनका मुख्यालय जोगेंद्रनगर और चौंतड़ा तय किया गया है।
हुड़दंग ने खोल दी पोल
जानकारी के अनुसार, चौंतड़ा के एक भवन में किराये पर रह रहे ये दोनों डाक सेवक अक्सर शोर-शराबा और हुड़दंग मचाते थे। गुरुवार रात को इनके व्यवहार से तंग आकर स्थानीय निवासियों और व्यापार मंडल ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। शुक्रवार सुबह जब पुलिस की टीम मामले की जांच के लिए उनके कमरे पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। कमरे के भीतर चारों तरफ सरकारी पत्र, लिफाफे और जरूरी दस्तावेज बिखरे पड़े थे। इनमें स्थानीय विधायक प्रकाश राणा के नाम आए पत्र, आम लोगों के आधार कार्ड, बैंकों के गोपनीय दस्तावेज और प्रदेश सरकार का साप्ताहिक समाचार पत्र ‘गिरिराज’ शामिल थे।
कागजों में होती रही खानापूर्ति
पुलिस ने तुरंत इसकी सूचना डाक विभाग के उच्चाधिकारियों को दी। मौके पर पहुंचे चौंतड़ा के पोस्टमास्टर चंद्र प्रकाश और मंडी के डाक पर्यवेक्षक गुलाब ठाकुर ने सभी पत्रों को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित डाकघर पहुंचाया। विभागीय जांच में सामने आया है कि करीब तीन वर्ष पहले नियुक्त हुए ये दोनों कर्मचारी फील्ड में जाकर डाक बांटने के बजाय केवल कागजों में ही वितरण की फर्जी एंट्री कर रहे थे। मयंक गोलवां डाकघर में कार्यरत था, जबकि दीपक के पास जलपेहड़ क्षेत्र की जिम्मेदारी थी।
बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद
तलाशी के दौरान मयंक के पास से 23 पंजीकृत (रजिस्टर्ड) और 58 साधारण पत्र मिले। वहीं, दीपक के पास से 24 पंजीकृत और 50 साधारण पत्र बरामद हुए हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर 47 महत्वपूर्ण पंजीकृत पत्र और 108 साधारण पत्र इन कर्मचारियों ने दबा रखे थे। वरिष्ठ डाक अधीक्षक संजय कुमार ने बताया कि विभाग की पहली प्राथमिकता रुकी हुई डाक को तुरंत उनके सही पतों पर पहुंचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता के विश्वास और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।