चंडीगढ़। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच रावी और ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर चल रहे दशकों पुराने विवाद को सुलझाने की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। सेवानिवृत्त जस्टिस विनीत सरन की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल ने रविवार को पंजाब के विभिन्न संवेदनशील जल क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान पंजाब सरकार ने राज्य में पानी की लगातार घटती उपलब्धता और कृषि क्षेत्र के सामने खड़ी चुनौतियों को ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रमुखता से प्रस्तुत किया।
तीन सदस्यीय यह ट्रिब्यूनल शनिवार शाम अमृतसर पहुंचा था, जहां मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदस्यों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया। इसके बाद रविवार को ट्रिब्यूनल की टीम ने हरिके हेडवर्क्स, फिरोजपुर स्थित बल्लेवाल हेडवर्क्स और भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित हुसैनीवाला क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान पंजाब के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल को नदियों में पानी के वर्तमान प्रवाह और राज्य की वास्तविक जरूरतों से अवगत कराया।
अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल को जानकारी दी कि पंजाब में अब पानी की इतनी कमी हो चुकी है कि राज्य अपनी खुद की जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम नहीं है। पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि नदियों के जल आवंटन की मौजूदा व्यवस्था दशकों पुराने और अप्रासंगिक आंकड़ों पर आधारित है। पिछले 40 वर्षों में इन नदियों में पानी की कुल आवक में भारी गिरावट आई है, जिसे ध्यान में रखते हुए अब नए सिरे से जल आवंटन की समीक्षा की जानी चाहिए।
ट्रिब्यूनल के सामने रखे गए आंकड़ों के अनुसार, साल 1981 में रावी और ब्यास नदियों में कुल जल उपलब्धता 17.17 एमएएफ थी, जो साल 2021 तक घटकर लगभग 13 एमएएफ ही रह गई है। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि जब पानी का कुल भंडार ही कम हो गया है, तो पुराने समझौतों के आधार पर बंटवारा जारी रखना पंजाब के किसानों के साथ अन्याय होगा। विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
निरीक्षण के दौरान पंजाब सरकार ने एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए बताया कि पाकिस्तान की ओर से सतलुज नदी में प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के कसूर क्षेत्र के चमड़ा उद्योगों से निकलने वाला रासायनिक और दूषित पानी सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र के सतलुज में मिल रहा है। इस जहरीले पानी के कारण न केवल सिंचाई प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय आबादी और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसके घातक परिणाम दिख रहे हैं।
पंजाब सरकार को विश्वास है कि ट्रिब्यूनल द्वारा किए गए इस जमीनी निरीक्षण से राज्य के पक्ष को मजबूती मिलेगी और घटते जल स्तर की वास्तविकता सामने आएगी। पंजाब का दौरा संपन्न करने के बाद अब यह ट्रिब्यूनल राजस्थान का रुख करेगा, जहां विवाद से जुड़े संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद ही ट्रिब्यूनल अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा, जिससे इस जटिल जल विवाद के समाधान की दिशा तय होगी।