शिमला। हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को प्रदेश की राजनीति का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला है। हालांकि आधिकारिक रूप से ये चुनाव पार्टी चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े गए थे, लेकिन दोनों ही दलों ने अपने समर्थित प्रत्याशियों की जीत के बड़े-बड़े दावे किए हैं। परिणामों के अनुसार, कई स्थानों पर मुकाबला त्रिकोणीय रहा, जबकि कुछ जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवार किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
राज्य के 47 शहरी निकायों में से 25 नगर परिषदों और 22 नगर पंचायतों के चुनाव परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। वर्तमान आंकड़ों के आधार पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने 20 नगर निकायों में बढ़त बनाई है, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार 16 निकायों में जीत दर्ज करने में सफल रहे हैं। 11 निकायों में निर्दलीयों और अन्य का दबदबा रहा है। नगर परिषद और नगर पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन के समय ही वास्तविक तस्वीर साफ हो पाएगी कि किस दल का पलड़ा भारी रहा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए देहरा और ज्वालामुखी के नतीजे विशेष चर्चा में रहे। मुख्यमंत्री की पत्नी कमलेश ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र देहरा में कांग्रेस ने भाजपा के वर्षों पुराने किले को ढहा दिया है। लंबे समय से भाजपा के कब्जे वाली इस परिषद में पार्टी केवल दो वार्डों तक सिमट कर रह गई है। दूसरी ओर, नाहन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल अपनी साख बचाने में कामयाब रहे, जहां 13 वार्डों में से सात पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते और पार्टी की लगातार तीसरी जीत सुनिश्चित की।
शिमला जिले के शहरी निकायों में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। जुब्बल नगर पंचायत में कांग्रेस समर्थित छह उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जबकि भाजपा को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा। चौपाल में कांग्रेस के पांच प्रत्याशी विजयी रहे। रामपुर और ठियोग नगर परिषद में दोनों ही दलों के बीच चार-चार और तीन-तीन सीटों के साथ बराबर की टक्कर रही, जहां निर्दलीय उम्मीदवार निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सोलन, बिलासपुर और ऊना जैसे जिलों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने एकतरफा बढ़त हासिल की है।
इस चुनावी नतीजों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच श्रेय लेने की होड़ मची है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव हरिकृष्ण हिमराल ने दावा किया है कि 30 निकायों में कांग्रेस को बढ़त मिली है और जनता ने सरकार की नीतियों और विकास कार्यों पर मुहर लगाई है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल का तर्क है कि 25 में से 18 नगर परिषदों और 22 में से 12 नगर पंचायतों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने बहुमत प्राप्त किया है। बिंदल के अनुसार, कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी भाजपा ने सेंधमारी कर शानदार प्रदर्शन किया है।
गौरतलब है कि साल 2021 के चुनावों में तत्कालीन भाजपा सरकार ने अधिकतर निकायों में कब्जा किया था, लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस ने कई स्थानों पर अपने अध्यक्ष बना लिए थे। अब सभी की नजरें 31 मई को आने वाले उन चार नगर निगमों (धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन) के नतीजों पर टिकी हैं, जो सीधे पार्टी चुनाव चिह्न पर लड़े गए हैं। इन परिणामों से ही प्रदेश की राजनीतिक दिशा का वास्तविक अनुमान लगाया जा सकेगा।