नई दिल्ली। लोकसभा में पंजाब वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या का मामला गूंजा, जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। शाह ने सदन में आश्वासन दिया कि यदि पंजाब के सांसद उन्हें इस संबंध में लिखित अनुरोध देते हैं, तो केंद्र सरकार तुरंत इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का है, इसलिए केंद्र को इसमें हस्तक्षेप करने के लिए सांसदों के औपचारिक पत्र की आवश्यकता होगी।
अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि रंधावा की मौत का सीधा संबंध पंजाब में अनाज भंडारण के लिए बनने वाले गोदामों से है। औजला के अनुसार, एफसीआई के लिए 50 हजार टन क्षमता के गोदाम बनाए जाने थे, जिनमें से 20 हजार टन का आवंटन पंजाब के कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के पिता को पहले ही मिल चुका था। आरोप है कि शेष 30 हजार टन के गोदाम भी अपने पक्ष में करवाने के लिए जिला मैनेजर पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
सांसद औजला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब गगनदीप रंधावा ने इस दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया, तो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनके साथ मारपीट की गई और यहां तक कि उनके बच्चों को भी जान से मारने की धमकियां दी गईं। इसी मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर रंधावा ने आत्मघाती कदम उठाया। जब औजला अपनी बात रख रहे थे, तभी अमित शाह ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए सीबीआई जांच का प्रस्ताव रखा।
सदन में मौजूद रेलवे राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि एक ईमानदार अधिकारी ने अपनी और अपने परिवार की गरिमा की रक्षा के लिए जहर खाकर जान दे दी। बिट्टू ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने यह डर भी जताया कि आरोपी मंत्री कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए विदेश भाग सकते हैं।
पंजाब में इस समय 13 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से सात कांग्रेस, तीन आम आदमी पार्टी, एक शिरोमणि अकाली दल और दो निर्दलीय सांसदों के पास हैं। राज्यसभा की सभी सात सीटों पर आम आदमी पार्टी का कब्जा है। अब गगनदीप रंधावा को न्याय दिलाने के लिए अमित शाह द्वारा रखी गई ‘लिखित मांग’ की शर्त पर विभिन्न दलों के सांसदों का रुख महत्वपूर्ण होगा। इस मामले ने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।